कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 22 जून 2016

दो उदास दिल

उदास था मन
और ख़ाली भी था
जीवन भी बेरंग था
और लम्हें भी उदास

फिर

एक और खाली मन मिला
दोनों के खालीपन को
कोई नया जीवन मिला
जी उठा वो हर उदास लम्हा

मन चंचल भी खिल उठा
साँसों को धड़कनें की वजह मिली
आँखें भी उनके नूर से खिली
तक़दीर भी आज ज़िन्दगी से मिली

#
जी कर वो लम्हा कोई भी उदास ना था
मन को ऐसी ख़ुशी मिलेगी विश्वास ना था
सकूँ के इन लम्हों को सहेजना तुम भी
अक्सर मीठी यादें ही जीवन को खूबसूरत बनाती है

शनिवार, 21 मई 2016

वियोग की पीड़ा

तिनका तिनका जोड़ बुना था आशियाना
घर का एक चिराग बुझते ही उजड़ गया

वियोग की पीड़ा से माँ का दिल रो पड़ा
हाय रे किस्मत, अधेड़ उम्र में बाँझ हो गई
हंसती खेलती मेरी कोख़, काल ग्रस्त हो गई

किसे सुनाओ पीड़ा, ऐसा छुआ कोई कीड़ा
अमृत भरे जीवन में, जहर कोई खोल गया
पुत्र के वियोग में, माँ का दिल रो पड़ा

अँखियों में उम्र भर की बेबसी ने डेरा है डाला
23 बरस की ममता आज क्यों ढेर हो गई
किसकी नजर लगी मेरी गोद जो सुनी हो गई

रोती बिखलाती पूछती है आज वो माँ
किस के सहारे जिंदगी की लौ जगाऊँ में
सुनी दहलीज पर किसको लाल बुलाऊ में

वियोग की पीड़ा देख उस माँ की आज
जग सारा टूट पड़ा, दिलासा बांधने को
मगर गांठ बंधे कैसे जब धागा ही खो गया

कुदरत के इस लेख पर हर कोई घबराया है
जाने किस घड़ी माँ ने अपना लाल गंवाया है
हर पत्थर दिल ने, अपना सर झुकाया है

#
बदनसीबी का ये आलम
मंजर है जो बेबसी का
किसी के जीवन में ना आए
जगमगाती कोख क्यों बुझ जाए

गुरुवार, 19 मई 2016

बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

जग की रीत ऐसी निराली
जो सुनी एक बार दिल की बात
सब का गुनहगार मैं हो गया
बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

कुछ हुआ आज, जो पहली बार था
ज़मीर था मेरा जो आज साकार हुआ
पर दुनिया की नजर में ये गुनाह हो गया
बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

धड़कनें मेरी कुछ इस कदर, बहक गई
उसके प्यार की खुशबू से ज़िन्दगी महक गई
फिर क्यों ज़माने में हाहाकार हो गया
बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

#
शुक्रिया उस दिल का,
मेरी भावना जो दिल की
सरांखों पे बिठा गया
इनकार कर के भी
इक़रार से कह गया
उसका तो पता नहीं
मेरा दिल दिल रह गया

#
उम्र भर ज़िन्दगी कठपुतली बनी रही
जो दिल की सुनी तो अपनी हो गई

मंगलवार, 17 मई 2016

शब्दों के आंसू

पत्थर से भी वजनदार हो गया
उसके जीवन में मेरा किरदार

अब मेरी हर कहानी उसके लिए
सिर्फ एक लफ़्ज भर हो गई है

कुछ ओह आह की दाद दिया करता है
मेरी हर बात पे इरशाद किया करता है

मायने नहीं उसको मेरी कविताओं के
एक भूली बिसरी याद समझ भुला देता है

मेरी बातें दिल से ना लगे, इसलिए रो देता है
जितनी भी आरजू करूँ, आंसुओ से धो देता है

जब हूँ ही नहीं, उसके जीवन का किरदार
फिर क्यों तानों से जख़्म दिया करता है

जब भी कोशिश करता हूँ आगे बढ़ने की
फिर उस दोराहे पर, ला दिया करता है

कुछ दर्द बांटने की थी जिस से ख्वाहिश
वो ही आंसुओ में डुबो दिया करता है

कमजोर दिल/जिगर भी क्या चीज है
समझने को तो सबके लिए अजीज है

पर ये भी इस समाज की ही तमीज़ है
व्यवहारिक दुनिया में हम सिर्फ नाचीज है

शनिवार, 9 अप्रैल 2016

चिंता

सबको खाती है
कुछ बात हुई न
कि चली आती है
हँसते खेलते जीवन में
कौन सी आग लगाती है

मंगलवार, 22 मार्च 2016

मैं औरत हूँ

काँच की तरह रोज टूट जाती हूँ
अपने ही वजूद से पीछे छूट जाती हूँ

हर दिन नया ज़ख्म, मेरे जिस्म पर उकेर देता है
अपनी हवस और क्रोध से, मेरी रूह हर लेता है

बेबसी का ये मंजर, दशको से मेने ही झेला है
खुशियो को जब भी चाहा, पीछे ही धकेला है

बर्बरता का आलम तो देखो उस वहशी का
नफ़रत भी हमसे, और मोहब्बत का तकाजा भी

अस्तित्व की लड़ाई मैं हार गई मैं लड़ते लड़ते
नोच गया मेरा जिस्म वो, बेजान मानकर

मेरी रूह  को तार तार कर गया, जबरदस्ती मोहब्बत से
कौन सा सकूँ मिल गया उसे, मेरी बंजर सी धरती से

शनिवार, 12 मार्च 2016

कांटा बन चुभता हूँ मैं

जिनके दिलों के गुलाब होते थे
अब कांटा बन चुभता हूँ मैं

जिनके ख़्वाबों में हुआ करते थे हम
दूस्वप्न बन नासूर बन गया हूँ मैं

ख़ुदा की इबादत थे जिनकी नजरों में हम
आज उन क़दमों की ठोकर बन गया हूँ मैं

उम्र भर कड़वे शब्दों के जाम की बात करते थे जो
आज कागज के टुकड़े समझने लगे है वो

बस कुछ इस तरह ही दुखता हूँ मैं
अब कांटा बन चुभता हूँ मैं

गुरुवार, 3 मार्च 2016

औरत के समर्पण की पहचान है वो

हर कदम लड़ती है
तब ही साहसी लगती है

ज़िन्दगी उसके लिए मुश्किलें चुनती है
वो बस हर मुसीबत का हल बुनती है

हर गम ने आकर उसको घेरा है
पर उसके दिल में रौशनी का बसेरा है

मोतियों सा चमकता रहता है वो
बेशक मायूसी का उम्र भर साया हो

होंठो से खुशियों को बांटता है हर पल
बेशक़ उदासी से भरा है उसका हर पल

हौंसलों की उड़ान है वो
मजबूती की पहचान है वो

औरत के समर्पण की पहचान है वो

बुधवार, 2 मार्च 2016

ओह सजन रे

मोतियों सा चमके है तू
अँखियो में दमके है तू
ओह सजन रे

धड़कनो का साज हो गया तू
मेरा कल और आज हो गया तू
ओह सजन रे

पलकों के तले रहने लगा है तू
साँसों संग बहने लगा है तू
ओह सजन रे

रगों में बहता है दर्द बनकर तू
ज़िन्दगी में हो शामिल दवा बनकर तू
ओह सजन रे

ज़िन्दगी भर की जागीर तो नहीं तू
बस दो पल का सुखद मिलन बन जा तू
ओह सजन रे

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

आखिर तू है कहीं

ख़ामोश रहने लगा है
शायद थोड़ा उदास भी

मुझे से बातें करने से कतराता है
हर लम्हा वो नजरें जो चुराता है

कभी मिल भी जाए गर नजर
एक झूठी मुस्कान बिखेर जाता है

मेरे सीने को इतने प्रहार कर जाता है
फिर भी एक कोने में अलख जगाता है

एक ख़ुशी आखिर तू है कहीं
दिल को सकूँ दिलाती है
तेरी मौजूदगी ही तो है
मेरी नब्ज़ चलती जाती है

#
बेशक़ मेरी राहों से, बंद हुआ तेरा आना
मगर आज भी पायल की खनक का हूँ दीवाना

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

ज़िन्दगी

मिल गया मुकद्दर
कि ज़िन्दगी उड़ने लगी

काँटों सी झूलती
मखमल पर चलने लगी

बरसो से तपती हुई अँखिया
आज झील सा शांत हो गई

रोज रोज की तंग थी खुशिया
आज खुलकर मेरी ही हो गई

सदियो से कटती ना थी जो रतिया
आज खुले आँगन में ही सो गई

लगता तो है आखिर
मेरी ज़िन्दगी मेरी हो गई

मंगलवार, 12 जनवरी 2016

मोह छोड़ उनसे है नाता तोड़ा,

बहते अश्क़ो को अब नहीं है रोना
ज़िन्दगी जो बन गई थी एक खिलौना
उसे कुछ सपनो से है संजोना
क्योंकि आज मेने मोह छोड़ उनसे है नाता तोड़ा,

रिश्तों की जुगलबंदी में उलझा था जो
आज उन्माद से भरे नव पथ पर चला है वो
रोज़ के झगडे अब ना मुस्करा ना पाएंगे
मेरे जीवन में भी रंग आएंगे
क्योंकि आज मैंने मोह छोड़ उनसे है नाता तोड़ा,

सिसकते लम्हें इतिहास हो जायेंगे
कांपते हुए स्वर, गीत गुनगुनाएंगे
हम अब खुद भी खुश रहेंगे,
लिया प्रण औरो को भी हंसाएंगे
क्योंकि आज मैंने मोह छोड़ उनसे है नाता तोड़ा,
एक नया पन्ना आज फिर ज़िन्दगी में है जोड़ा

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

मोम सा हो गया हूँ मैं उस पत्थर के प्यार मैं

मोम सा हो गया हूँ मैं
उस पत्थर के प्यार मैं
वक़्त से नाता तोड़ दिया
उस कम्बखत के इन्तजार में
मोम सा हो गया हूँ मैं
उस पत्थर के प्यार मैं

बहुत जतन लगाये
उसके दिल को रास ना आया
मेरे धड़कते दिल का
उसको विश्वास ना हो पाया
मोम सा हो गया हूँ मैं
उस पत्थर के प्यार मैं

मेरी आहों पर हँसता था वो
मेरी साँसों में रचता था जो
टूट कर बिखर गया उसकी बाँहों में
वो काँटे बिखेर गया मेरी राहों में
मोम सा हो गया हूँ मैं
उस पत्थर के प्यार मैं

ज्योति बन जिंदगी रोशन कर दे ये समझा था मैं
आंसुओ का समुन्दर मेरी झोली में डाल गया है वो
नासूर बन जिंदगी को डस गया है जो
मोम सा हो गया हूँ मैं
उस पत्थर के प्यार मैं



रविवार, 8 नवंबर 2015

काव्य रस

काव्य मेरा रसहीन हो गया
जब से वो और भी हसीन हो गया

उसके लिए में ज़मीन
वो मेरा आस्मां हो गया

काव्य को मेरे हास्य जताता है
अपने रूप को सर्वोपरि दर्शाता है

जब से वो मेरे लिए अनमोल हुआ
मेरा स्वयं का मोल खो गया

#
वक़्त ही फल का रंग दिखाता है
अच्छे से अच्छा बदल जाता है

बुधवार, 16 सितंबर 2015

बेगानो से अपने अपनों से बेगाने

नन्हें कदमो से चलना सीखा था
की बचपन छीन लिया
अपने और कुछ बेगानो ने

खेत खलिहानों की जगह ले ली
आलीशान मकानों ने
ऐसा छला मुझे अपने और कुछ बेगानो ने

वक़्त की रैना में वो बेगाने भी अपने हो गए
हम कुछ वक़्त के लिए हसीं सपनो में खो गए
लगने लगा है कि वो बेगाने भी अपने हो गए

रास ना आई मेरी खुशिया, अपनों की ही नजर लग गई
इस तरह हुयी विपदा की
जो बेगाने हुए थे अपने
आज फिर बेगानो सा हो गए

जो संजोये थे संग जीने के सपने
वो कहीं अपनों की खुशियो में खो गए
जो बेगाने हुए थे अपने
आज फिर बेगानो सा हो गए

#
क्या खेल जीवन ने है खेला
आगे बढ़ने को नहीं
पीछे हटने को नहीं

तथ्य:- एक दोस्त ने अपने दोस्त की वेदना सुनाई थी कुछ इस तरह ही व्यक्त कर पाया॥ हिम्मत ना हुयी कुछ और लिखने की

शनिवार, 5 सितंबर 2015

सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर


सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
बेदर्दी से दौड़े जा रहा हूँ
ना आज होश है ना कल की खबर

दर्द के सिवा कोई मंजर नहीं
फिर भी बह गया हूँ रसधार में
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

नाउम्मीदें के आलम में एक उम्मीद जगाये बैठा हूँ
नफ़रत के माहौल में मोहब्बत लौ जगाये बैठा हूँ
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

तू बेशक मुझे तरह तरह के नाम से बुलाता है
पर मेरा दिल सिर्फ एक ही धुन समझ पाता है
तेरे लिए एक ही राग गुनगुनाता है
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

बतिया मुझे से तू घडी दो घड़ी
मेरी ज़िन्दगी की टूटे ना लड़ी
तेरे कदमो में मेरी जान है अड़ी
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
तेरे दिल को छु जाऊंगा
नफरत के समुन्दर को
मीठे पानी की झील कर जाऊंगा
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

#
ऐसा आया हूँ तेरे जीवन में
तोहफा समझ रब्ब का अपना बना लेना
ना पसंद आये तो बुरा सपना
समझ कर भूल जाना

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

उलझन भरी ज़िन्दगी

कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

मकसद नहीं
कोई इसका
फिर भी उलझाती है
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

बेमतलब का तमाशा
कभी आशा
कभी निराशा
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

कोई खींच लेता है
ख्वाहिशों को दबाकर
थोपी जाती है
उनकी मेहरबानियां
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

कोई सब कुछ लूटा देता है
कोई सब लूट ले जाता है
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

किसी ने सजदा किया
तो किसी ने किया रुस्वा
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

बर्दाश्त नहीं किसी को आह भी
कोई उम्र भर की चोट से उफ़ नहीं करता
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

किसी ने मतलब से अपनों को खो दिया
कोई बेमतलब गैरो को अपना बना गया
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

#
ज़िन्दगी की उलझनें हो जाएँगी कम
गर दिल से लगाना
और किसी को समझाना छोड़ दें

रविवार, 9 अगस्त 2015

क्यों आदत हो गई .......

क्यों आदत हो गई
मुझे तड़पाने की
बात बात पर रूठ जाने की

संजोता हूँ सपने तेरे संग
वक़्त बिताने के
तू ढूंढता है बहाने
मुझ से दूर जाने के
क्यों आदत हो गई .......

बेशक ये रिश्ता मेने बनाया है
दिल ने तेरे भी हामी भरी होगी
बेशक हमारी राहें जुदा होंगी
फिर भी ज़िंदा मोहब्बत होगी
क्यों आदत हो गई .......

गुजारिश है तुझ से इतनी मेरी
चाहे मुझसे मीलों दूर चले जाना
पर रिश्ता है जो, अंतिम सांस तक निभाना
किसी भी वहम को मध्य ना लाना
क्यों आदत हो गई .......

#
मैं कुछ भी कह जाता हूँ बेचैनी में
गर तुझे है चैन मेरे दोस्त
मेरी बेचैनी ने जो किया है सवाल
उसका हल भी ढूंढ लाना



शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

दास्ताँ ए इश्क़

सामने बैठे है हजूर
थोड़ा नजरों से दूर
कुछ वो मजबूर
कुछ हम मजबूर

हल्की सी मीठी मुस्कान
साँसों से छुट्ती मेरी जान
नजरें जो मिल बैठे एक बार
उनके हो जाते हम पर एहसान

दिल से दिल की है पहचान
जानते हुए भी है अनजान
कानो में गूंजते उसके स्वर
मिश्री सा हुआ जाता हूँ मधुर

बरस बीत गए उनको निहारते
हम है की नजरों से नहीं उतारते
वो है कभी, अपना कह नहीं पुकारते
कभी तो एक लम्हा मेरे संग गुजार
बिलखती रूह का हो जाये उद्धार

#
चोरी सीना जोरी का जो है ये खेल
इस से होता नहीं दो दिलो का मेल
उम्र भर की कसक सीने को रुलाती है
वक़्त बे वक़्त वो बहुत याद जो आती है

गुरुवार, 30 जुलाई 2015

कुछ शब्द

मोहब्बत बेइंतहा
वो नासूर हो गई
मेरी ये ही खता
मेरा कसूर हो गई

तू बेवफा है इतना कह
वो मुझ से दूर हो गई
उसकी दरियादिली और
मेरी बेवफाई मश्हूर हो गई

कसम से वो आठ पहर में
कुछ घडी तो हंसाता है
बाकि लम्हें बस रुलाता है

उम्र भर दिल में रखने का वादा करता है
पर जाने क्यों, सब से कहने से डरता है

उसूलों से बंधा है इस कायदे भरी दुनिया के
बस लम्हों में जीता है, उम्र भर के बोझ तले

#
पागल हो गया है दिल, कुछ भी लिख देता है
कभी अपनी किस्मत तो कभी उसकी तक़दीर

कड़वे शब्द बोलता हूँ