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शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

ग़जल:- हर जर्रे की बात कहूँ तो......

हर जर्रे की बात कहूँ तो
यहाँ पर सब बिकता है
लहू और आंसुओ का
सैलाब भी बिकता तो है

हर जर्रे की बात कहूँ तो......

महकते हुए गुलाबों का
अर्क भी बिकता तो है
सुर्ख होंठो से हँसी का
सैलाब भी रुकता तो है

हर जर्रे की बात कहूँ तो......

हुस्न के बाजारों में
जज़्बात कहाँ टिकता है
हरी गली मोहल्ले में जिस्म तो है
ख़रीददार भी तो दिखता है

हर जर्रे की बात कहूँ तो......

ग़रीबी के चादर पर मेहनत का सौदा तो है
अमीरी के शौक़ पर, पसीना भी बहता तो है
चंद सिक्कों के लिए इंसान बिकता भी तो है

हर जर्रे की बात कहूँ तो......

क़िस्मत का भरोसा करे भी तो क्या
भाग्य में लिखा जो वो मिटता भी तो है
बस चलते रहो अँधेरी राहों पर
कभी कभी उजाला दिखता भी तो है

हर जर्रे की बात कहूँ तो
यहाँ पर सब बिकता है
लहू और आंसुओ का
सैलाब भी बिकता तो है

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

ए दिल है मुश्किल

ख्वाहिशों की बिसात
मुझे उसकी
उसे किसकी
किसको जाने किसकी
ए दिल है मुश्किल

मिला सकूँ नही
ना मुझे
ना उसको
ना किसी को
ए दिल है मुश्क़िल

दोस्ती थी
या प्यार
वफ़ा थी कि
बेवफा यार
ए दिल है मुश्क़िल

हर कोई था चाह में
किसी की परवाह में
खो गया था इश्क़ की राह में
ए दिल है मुश्क़िल

#
एक तरफ़ की
इबादत हो या मोहब्बत
ख़ुदा से हो खुदा नहीं
महबूबा से हो महबूबा नहीं
बस है तो दिल ए मुश्क़िल

सोमवार, 24 अक्टूबर 2016

कंचन करनाल बनाने का

कंचन करनाल बनाने का बीड़ा हमने उठाया है
गाँव गाँव स्वच्छता का दीपक जलाया है
खुले में शौच मुक्त  का सपना सजाया है
कंचन करनाल .........2

हर गली मोहल्ले में जाकर, लोगो को स्वच्छता सन्देश सुनाया है
खुलें में शौच से होने वाली बीमारियों से चेताया है
कंचन करनाल  ..........2

निगरानी समितियों ने ठीकरी पहरा लगाया है
गाँव के हर चौन्क पर सुबह शाम का डेरा जमाया है
लोगों को खुले में शौच रोकनेे का संकल्प निभाया है
कंचन करनाल ......2

पंच हो या सरपंच
आंगनवाड़ी वर्कर हो या आशा वर्कर
नंबरदार हो या चौकीदार
स्वच्छता के बने है सब पहरेदार
सब मिलकर बदल रहे गाँव की तस्वीर
कंचन करनाल ......2

नन्हें सिपाहियों ने भी, स्वच्छता डोर थामी है
स्वच्छता रैली कर-कर सब को है बतलाया
खुलें में शौच ने मेरे गाँव का मान है घटाया
कंचन करनाल .......2

गाँव के हर घर बनवाया  है शौचालय
जब से चली मुहीम, गाँव हुआ देवालय
शपथ ले हर जन, खुलें में शौच से बदले मन
कंचन करनाल का .....2

बुधवार, 22 जून 2016

दो उदास दिल

उदास था मन
और ख़ाली भी था
जीवन भी बेरंग था
और लम्हें भी उदास

फिर

एक और खाली मन मिला
दोनों के खालीपन को
कोई नया जीवन मिला
जी उठा वो हर उदास लम्हा

मन चंचल भी खिल उठा
साँसों को धड़कनें की वजह मिली
आँखें भी उनके नूर से खिली
तक़दीर भी आज ज़िन्दगी से मिली

#
जी कर वो लम्हा कोई भी उदास ना था
मन को ऐसी ख़ुशी मिलेगी विश्वास ना था
सकूँ के इन लम्हों को सहेजना तुम भी
अक्सर मीठी यादें ही जीवन को खूबसूरत बनाती है

गुरुवार, 19 मई 2016

बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

जग की रीत ऐसी निराली
जो सुनी एक बार दिल की बात
सब का गुनहगार मैं हो गया
बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

कुछ हुआ आज, जो पहली बार था
ज़मीर था मेरा जो आज साकार हुआ
पर दुनिया की नजर में ये गुनाह हो गया
बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

धड़कनें मेरी कुछ इस कदर, बहक गई
उसके प्यार की खुशबू से ज़िन्दगी महक गई
फिर क्यों ज़माने में हाहाकार हो गया
बस दिल है मेरा, मेरा ही हो गया

#
शुक्रिया उस दिल का,
मेरी भावना जो दिल की
सरांखों पे बिठा गया
इनकार कर के भी
इक़रार से कह गया
उसका तो पता नहीं
मेरा दिल दिल रह गया

#
उम्र भर ज़िन्दगी कठपुतली बनी रही
जो दिल की सुनी तो अपनी हो गई

मंगलवार, 17 मई 2016

शब्दों के आंसू

पत्थर से भी वजनदार हो गया
उसके जीवन में मेरा किरदार

अब मेरी हर कहानी उसके लिए
सिर्फ एक लफ़्ज भर हो गई है

कुछ ओह आह की दाद दिया करता है
मेरी हर बात पे इरशाद किया करता है

मायने नहीं उसको मेरी कविताओं के
एक भूली बिसरी याद समझ भुला देता है

मेरी बातें दिल से ना लगे, इसलिए रो देता है
जितनी भी आरजू करूँ, आंसुओ से धो देता है

जब हूँ ही नहीं, उसके जीवन का किरदार
फिर क्यों तानों से जख़्म दिया करता है

जब भी कोशिश करता हूँ आगे बढ़ने की
फिर उस दोराहे पर, ला दिया करता है

कुछ दर्द बांटने की थी जिस से ख्वाहिश
वो ही आंसुओ में डुबो दिया करता है

कमजोर दिल/जिगर भी क्या चीज है
समझने को तो सबके लिए अजीज है

पर ये भी इस समाज की ही तमीज़ है
व्यवहारिक दुनिया में हम सिर्फ नाचीज है

शनिवार, 9 अप्रैल 2016

चिंता

सबको खाती है
कुछ बात हुई न
कि चली आती है
हँसते खेलते जीवन में
कौन सी आग लगाती है

बुधवार, 30 मार्च 2016

कशमकश में हूँ मैं

कश्मकश में हूँ मैं
वो मेरा है
दिल कहता है
हो सकता नहीं

भुलाना भी चाहूँ गर उसे
मेरी साँसे क्यों टूटती है
एक पल को लगे
पीछे दुनिया छूटती है
कश्मकशम मे हूँ मैं

वो बेशक़ भूला सा लगता है मुझे
कहीं राहों पर फिर मिल जाता है
मेरा उदास चेहरा खिल जाता है
वो नजरें क्यों फिर चुराता है
कशमकश में हूँ मैं

सोमवार, 14 मार्च 2016

मैं ही हूँ बस, ए दिल

हक़ जताना छोड़ दें ए दिल
कोई साथ नहीं निभाता
है ज़िन्दगी जब तलक
मैं ही हूँ बस, मैं ही हूँ बस

पल दो पल को मिलते है लोग
अपने हिसाब से दुनिया बनाते
गम छोड़ उन लोगो के जाने का
मैं ही हूँ बस, मैं ही हूँ बस

दिमाग ने भी बहुत समझाया तुझे ए दिल
तेरी बनाई दुनिया में जीना है मुश्किल
पत्थर रख ले अरमानो की गठरी पर तू
मैं ही हूँ बस, मैं ही हूँ बस

समझ जरा तेरे लिए कोई दिल न बना ए दिल
बस आंसुओ पर खत्म होती है तेरी हर मंजिल
छोड़ दे और जान ले, चाहे  आज हो या कल
मैं ही हूँ बस, मैं ही हूँ बस



शनिवार, 12 मार्च 2016

कांटा बन चुभता हूँ मैं

जिनके दिलों के गुलाब होते थे
अब कांटा बन चुभता हूँ मैं

जिनके ख़्वाबों में हुआ करते थे हम
दूस्वप्न बन नासूर बन गया हूँ मैं

ख़ुदा की इबादत थे जिनकी नजरों में हम
आज उन क़दमों की ठोकर बन गया हूँ मैं

उम्र भर कड़वे शब्दों के जाम की बात करते थे जो
आज कागज के टुकड़े समझने लगे है वो

बस कुछ इस तरह ही दुखता हूँ मैं
अब कांटा बन चुभता हूँ मैं

शुक्रवार, 11 मार्च 2016

एक दोस्त

एक दोस्त
मिलता है
वादा करता
जिंदगी के
गुर सिखाने का

एक दोस्त
एक नदी में
तैरने की कला
वो सिखाने ले चला
जाने फिर क्या हुआ
हाथ छुड़ाया
अनजानों से मिलाया
छूमंतर हो गया

एक दोस्त
उम्मीदें जगाता है
होंसला बढ़ाता है
फिर क्यों
एक दिन
सब तोड़
सब छोड़
निकल जाता है
एक दोस्त एक दोस्त

गुरुवार, 3 मार्च 2016

औरत के समर्पण की पहचान है वो

हर कदम लड़ती है
तब ही साहसी लगती है

ज़िन्दगी उसके लिए मुश्किलें चुनती है
वो बस हर मुसीबत का हल बुनती है

हर गम ने आकर उसको घेरा है
पर उसके दिल में रौशनी का बसेरा है

मोतियों सा चमकता रहता है वो
बेशक मायूसी का उम्र भर साया हो

होंठो से खुशियों को बांटता है हर पल
बेशक़ उदासी से भरा है उसका हर पल

हौंसलों की उड़ान है वो
मजबूती की पहचान है वो

औरत के समर्पण की पहचान है वो

बुधवार, 2 मार्च 2016

ओह सजन रे

मोतियों सा चमके है तू
अँखियो में दमके है तू
ओह सजन रे

धड़कनो का साज हो गया तू
मेरा कल और आज हो गया तू
ओह सजन रे

पलकों के तले रहने लगा है तू
साँसों संग बहने लगा है तू
ओह सजन रे

रगों में बहता है दर्द बनकर तू
ज़िन्दगी में हो शामिल दवा बनकर तू
ओह सजन रे

ज़िन्दगी भर की जागीर तो नहीं तू
बस दो पल का सुखद मिलन बन जा तू
ओह सजन रे

बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

खुश है वो अपनी दुनिया में

एहसास हुआ
भ्रम था जो
आज टूट गया
जब उसका साथ
मुझ से छूट गया
लगता था कोई
मेरी खुशिया
लूट गया
खुश हो गया
वो अपनी दुनिया में
इतना बहुत है
हक़ जताना मुझे
कभी आया नहीं
इसलिए कोई भी रिश्ता
निभाया नहीं
वक़्त ही कुछ ऐसा है
हक़ जताये बिना
कुछ मिलता नहीं
सुखी जमीं पर
फूल खिलता नहीं

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

आखिर तू है कहीं

ख़ामोश रहने लगा है
शायद थोड़ा उदास भी

मुझे से बातें करने से कतराता है
हर लम्हा वो नजरें जो चुराता है

कभी मिल भी जाए गर नजर
एक झूठी मुस्कान बिखेर जाता है

मेरे सीने को इतने प्रहार कर जाता है
फिर भी एक कोने में अलख जगाता है

एक ख़ुशी आखिर तू है कहीं
दिल को सकूँ दिलाती है
तेरी मौजूदगी ही तो है
मेरी नब्ज़ चलती जाती है

#
बेशक़ मेरी राहों से, बंद हुआ तेरा आना
मगर आज भी पायल की खनक का हूँ दीवाना

कलम ...........बुनती अरमान

लिख देती
हर पन्ने पर खुशिया
कोरे मन को
शब्दों से बुन देती

मासूमियत भरे
अल्फ़ाज़ उसके
दिलों पे छा जाए

दो अनजान का
रिश्ता बनाए
एहसास सुनाए

दास्ताँ का लिफाफा
जिसने भी पढ़ा है
उसने खूब जाना और माना

दुआ है मेरी
कलम बुनती अरमान
यूँ ही चलती रहे

कोरी है जो जिंदगियां
इस कलम से खिलती रहे

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

ज़िन्दगी

मिल गया मुकद्दर
कि ज़िन्दगी उड़ने लगी

काँटों सी झूलती
मखमल पर चलने लगी

बरसो से तपती हुई अँखिया
आज झील सा शांत हो गई

रोज रोज की तंग थी खुशिया
आज खुलकर मेरी ही हो गई

सदियो से कटती ना थी जो रतिया
आज खुले आँगन में ही सो गई

लगता तो है आखिर
मेरी ज़िन्दगी मेरी हो गई

सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

क्यों बेचैन है वो

क्यों बेचैन है वो
जब साथ था तब भी
दूर हुआ तो अब भी
क्यों बेचैन है वो
पहले मेरे शब्दों से परेशां
अब मेरी ख़ामोशी से हैरान
क्यों बैचैन है वो
मैं बेशक टूटा हूँ
पर उस से छूटा हूँ
फिर क्यों बैचैन है वो
दुनिया भी छोड़ सकता नहीं
बहुतो की उम्मीदें तोड़ सकता नहीं
फिर क्यों बैचैन है वो
अपने आसमान की छाँव में
बेहतर रिश्तों की पनाह में
फिर क्यों बैचैन है वो
फिर क्यों बैचैन है वो

कड़वे शब्द बोलता हूँ