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शनिवार, 21 मई 2016

वियोग की पीड़ा

तिनका तिनका जोड़ बुना था आशियाना
घर का एक चिराग बुझते ही उजड़ गया

वियोग की पीड़ा से माँ का दिल रो पड़ा
हाय रे किस्मत, अधेड़ उम्र में बाँझ हो गई
हंसती खेलती मेरी कोख़, काल ग्रस्त हो गई

किसे सुनाओ पीड़ा, ऐसा छुआ कोई कीड़ा
अमृत भरे जीवन में, जहर कोई खोल गया
पुत्र के वियोग में, माँ का दिल रो पड़ा

अँखियों में उम्र भर की बेबसी ने डेरा है डाला
23 बरस की ममता आज क्यों ढेर हो गई
किसकी नजर लगी मेरी गोद जो सुनी हो गई

रोती बिखलाती पूछती है आज वो माँ
किस के सहारे जिंदगी की लौ जगाऊँ में
सुनी दहलीज पर किसको लाल बुलाऊ में

वियोग की पीड़ा देख उस माँ की आज
जग सारा टूट पड़ा, दिलासा बांधने को
मगर गांठ बंधे कैसे जब धागा ही खो गया

कुदरत के इस लेख पर हर कोई घबराया है
जाने किस घड़ी माँ ने अपना लाल गंवाया है
हर पत्थर दिल ने, अपना सर झुकाया है

#
बदनसीबी का ये आलम
मंजर है जो बेबसी का
किसी के जीवन में ना आए
जगमगाती कोख क्यों बुझ जाए

सोमवार, 30 नवंबर 2015

अक्स तलाशती ज़िन्दगी

अक्स तलाशती ज़िन्दगी ओझल हो गई है समस्याओ के काले बादलों में, कोई फुरसत का लम्हें की गुजारिश कर भी लूँ। कोशिशो के बावजूद फिर उसी चोराहे पर मिलता हूँ जहाँ रास्ते तो बहुत है, मगर मंजिल कहाँ होगी मालूम नहीं। हर जगह बेशक गलत हो सकता हूँ में, मगर मेरा दिल भी गलत है ये मालूम ना था। अक्सर सुना है दिल जो कहे वो किया कीजिये। कम्बखत भग दौड़ के ज़माने में हमारा तो दिल इम्तिहान में हार गया। मुझे किसी धर्म/जाति से कोई सारोकार नहीं। मेरी धड़कने एक ही भाषा की मुरीद है जो दिल से छूकर गुजरती हो। जब वो दिल को छूने वाली लहर भी कोई धोखा होने का एहसास दे तो आप के अंदर कोई ज़िन्दगी बाकि नहीं रहती।

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

कुछ तो बात है

कुछ तो बात है
जो आँखों से दिल में उतर गया वो
साँसों में बस
ज़िन्दगी बन गया है वो

कुछ तो बात है
पल भर संग उसके
सादियो सा जी लेता हूँ में
कुछ लम्हों में
उम्र भर की चोट ले लिया करता हूँ मैं

कुछ तो बात है
मेरी तस्वीर
आँखों में लिए फिरता है वो
मेरी हर बात
दिल पर लिए आहें भरता है वो

कुछ तो बात है
लबो पर मेरा नाम आये
तो दुनिया से डरता है वो
मैं खामोश हो जाऊ गर
तो दुनिया से लड़ता है वो

कुछ तो बात है

सोमवार, 24 अगस्त 2015

बेड़िया है मेरे पाँव म बेड़िया है मेरे पाँव मे े

बेड़िया है मेरे पाँव मे बेड़िया है मेरे पाँव मे ं
जो झुलस गया इश्क़ की छाँव मे
खिलने था जहाँ वहां मुरझा गया

बेड़िया है मेरे पाँव मे
बेड़िया है मेरे पाँव मे

हर बाजी हारा हूँ
मोहब्बत के दांव में
मोहरा बन रह गया
शतरंज के प्यादों सा

बेड़िया है मेरे पाँव मे
बेड़िया है मेरे पाँव मे

हर शब्द कर देता है घाव
जो करता इलाज वो मर्ज बन गया
हर लम्हां उनको एक अर्ज बन गया

बेड़िया है मेरे पाँव मैं बेड़िया है मेरे पाँव मे

उसको देखा जब से, मिट गए सब चाव
भूख प्यास सब एक हो गए उसकी आस में
नफ़रत भी भूल गया मोहब्बत की तलाश में
बेड़िया है मेरे पाँव मे
बेड़िया है मेरे पाँव मे

#
वजह बेशक तू है हर दर्द की
आराम भी रूह को तेरी झलक से आता है
मैं आज भी उसकी आह भरता हूँ
वो बेशक मुझे बेवफा बुलाता है

गुरुवार, 16 जुलाई 2015

धुंआ है ये मोहब्बत

धुआँ है ये मोहब्बत
एक बार बहुत नजर आती है
एक हवा के झोंके से
कहीं खो जाती है

मन होता बावरा जब तक धुआं होता है
और कुछ इसे नजर आता नहीं

मंगलवार, 14 जुलाई 2015

वज्र सा लगा है सीने को

उमंग भरे मन से
गए थे मिलने उनसे
गैर बता गए वो जब
वज्र सा लगा है सीने को

नजरों से जाने कितने वार करते है
बस जुबाँ से जाहिर होने से डरते है

जैसे चाहे हमे तोड़ मोड़ जाते है
खुद का दिल खोल, हमें बोझिल छोड़ जाते है

#
कैसे लिखूँ कोई नग्मा मेरे हजूर
तेरी याद आते ही, हो जाता हूँ मजबूर
ज़ख्म सा हो गया है तू सीने में
बस नजरों का मरहम लगाये फिरता हूँ

कड़वे शब्द बोलता हूँ