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शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

दास्ताँ ए इश्क़

सामने बैठे है हजूर
थोड़ा नजरों से दूर
कुछ वो मजबूर
कुछ हम मजबूर

हल्की सी मीठी मुस्कान
साँसों से छुट्ती मेरी जान
नजरें जो मिल बैठे एक बार
उनके हो जाते हम पर एहसान

दिल से दिल की है पहचान
जानते हुए भी है अनजान
कानो में गूंजते उसके स्वर
मिश्री सा हुआ जाता हूँ मधुर

बरस बीत गए उनको निहारते
हम है की नजरों से नहीं उतारते
वो है कभी, अपना कह नहीं पुकारते
कभी तो एक लम्हा मेरे संग गुजार
बिलखती रूह का हो जाये उद्धार

#
चोरी सीना जोरी का जो है ये खेल
इस से होता नहीं दो दिलो का मेल
उम्र भर की कसक सीने को रुलाती है
वक़्त बे वक़्त वो बहुत याद जो आती है

शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

फूलों सा हुआ आज वो मेहरबान मेरी ज़िन्दगी खुशबू से महका दी

फूलों सा हुआ आज वो मेहरबान
मेरी ज़िन्दगी खुशबू  से महका दी

रोते हुए गुजरा करते थे जो दिन
आज मंद मंद मुस्काने में गुजर जाते है
फूलों सा हुआ आज वो मेहरबान
मेरी ज़िन्दगी खुशबू  से महका दी

कभी वो अपनी बातों से, कभी उनकी नजरों से
ज़िन्दगी को मेरी, एक नयी लौ मिल जाती है
फूलों सा हुआ आज वो मेहरबान
मेरी ज़िन्दगी खुशबू  से महका दी

इस अधूरे इंसान संग जब ज़िन्दगी बिताने की बात करते है
मेरी अनसुलझी ज़िन्दगी पटरी पर सवार हो जाती है
फूलों सा हुआ आज वो मेहरबान
मेरी ज़िन्दगी खुशबू  से महका दी

रब्ब बख्श दे नेमत उनको भी, मेरे अधूरे जीवन में रौनक लाये
दामन उनका भी खुशियो से भर जाए, जीवन खुशबू महकाए
फूलों सा हुआ आज वो मेहरबान
मेरी ज़िन्दगी खुशबू  से महका दी

#
चन्द दोस्त बनाना तुम इस तरह
तुम्हारे जिस्म का हिस्सा हो जिस तरह
फिर देखना ये ज़िन्दगी
कितनी छोटी हो जाएगी
तुम और मांगोगे रब्ब से
और ये घटती जायेगी

कड़वे शब्द बोलता हूँ