नदी की व्यथा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
नदी की व्यथा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 21 मई 2016

वियोग की पीड़ा

तिनका तिनका जोड़ बुना था आशियाना
घर का एक चिराग बुझते ही उजड़ गया

वियोग की पीड़ा से माँ का दिल रो पड़ा
हाय रे किस्मत, अधेड़ उम्र में बाँझ हो गई
हंसती खेलती मेरी कोख़, काल ग्रस्त हो गई

किसे सुनाओ पीड़ा, ऐसा छुआ कोई कीड़ा
अमृत भरे जीवन में, जहर कोई खोल गया
पुत्र के वियोग में, माँ का दिल रो पड़ा

अँखियों में उम्र भर की बेबसी ने डेरा है डाला
23 बरस की ममता आज क्यों ढेर हो गई
किसकी नजर लगी मेरी गोद जो सुनी हो गई

रोती बिखलाती पूछती है आज वो माँ
किस के सहारे जिंदगी की लौ जगाऊँ में
सुनी दहलीज पर किसको लाल बुलाऊ में

वियोग की पीड़ा देख उस माँ की आज
जग सारा टूट पड़ा, दिलासा बांधने को
मगर गांठ बंधे कैसे जब धागा ही खो गया

कुदरत के इस लेख पर हर कोई घबराया है
जाने किस घड़ी माँ ने अपना लाल गंवाया है
हर पत्थर दिल ने, अपना सर झुकाया है

#
बदनसीबी का ये आलम
मंजर है जो बेबसी का
किसी के जीवन में ना आए
जगमगाती कोख क्यों बुझ जाए

रविवार, 26 अप्रैल 2015

सहस्त्रधाराओ में एक धारा हूँ में, किसी प्यासे का सहारा हूँ में

उदगम पावन और निश्छल
शास्त्रधाराओ में एक धारा हूँ में,
किसी प्यासे का सहारा हूँ में

बढ़ी थी एक अमृत बूँद बन
जग की प्यास मिटाने को
ज्यों ही देखा, रवैया जग का
अमृत को जहर बना दिया
जिसने पिया उसको जला दिया

सहस्त्रधाराओ में एक धारा हूँ में, किसी प्यासे का सहारा हूँ में साफ़ स्वस्थ बूँद से, मलिन मिलता रहा
मुश्क़िल मे उसका अस्तित्व हो गया
पावन था मन जिसका, मलिनता में खो गया

सहस्त्रधाराओ में एक धारा हूँ में, किसी प्यासे का सहारा हूँ में किसी ने अपना पाप है धोने को मेरा आँचल पाया
कोई मिट कर , मेरी लहरो सी गोद में समाया
मेरे अक्स का दर्द मगर किसी के जहन ना आया

शास्त्रधाराओ में एक धारा हूँ में, किसी प्यासे का सहारा हूँ में

ख्वाहिश मेरी, मेरी साँसे लौटा दे ओह रब्ब के बन्दे
छोड़ दे जो, मेरे सहारे है , तेरे बेवजह के धंधे
तू तो कारोबारी हो गया, मेरा जल भिखारी हो गया
तू चैन से सो गया, मेर प्यासे का धर्म भी कहीं खो गया

सहस्त्रधाराओ में एक धारा हूँ में, किसी प्यासे का सहारा हूँ में तेरी कबरगाह नहीं, ज़िन्दगी का सरमाया हूँ में
बोझिल न कर तू मुझे, जीवनदायनी स्वरुप है मेरा
हुआ जो अंधकारमय अस्तित्व मेरा, जाने कब हो सवेरा

सहस्त्रधाराओ में एक धारा हूँ में, किसी प्यासे का सहारा हूँ में

# एक दिन कहाँ जाएगा
जब मीठा जल कड़वा हो जाएगा
वो प्रलय भरा समय, गर सोचा ना
तो जल्द सब का जीवन मिटाएगा

कड़वे शब्द बोलता हूँ