शनिवार, 19 सितंबर 2026

हर चोट ने मुझे तराशा

हर चोट ने मुझे तराशा

Kadwashabd

ज़िंदगी ने कई मर्तबा करवटें बदलीं। ऐसे मोड़ भी आए, जहाँ हताशा की गहरी धुंध थी, उम्मीदें टूट रही थीं और मन भीतर तक बिखर जाता था। मगर हर बिखराव के बाद एक ठहराव आया, और हर ठहराव ने मुझे एक नए सांचे में ढाला।

वक़्त ने धीरे-धीरे एक कड़वा सच समझाया—जिन छोटी-छोटी घटनाओं और हादसों को मैं कभी अपनी बर्बादी समझता था, वे दरअसल मेरे निर्माण के औज़ार थे।

जिन लोगों ने मुझे तकलीफ़ दी, वे मेरी राह की रुकावटें नहीं थे। वे उस प्रक्रिया का हिस्सा थे, जिसने मुझे भीतर से मजबूत किया। आज समझ आता है कि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमें सुख देने नहीं, हमें तराशने आते हैं।

पत्थर पर चोट पड़ती है, तभी उसमें से मूरत निकलती है।
शायद इंसान भी इससे अलग नहीं है।

हर चोट कुछ काटती है,
हर ठोकर कुछ सिखाती है,
और हर टूटन भीतर किसी नए इंसान को जन्म देती है।

इसी तपिश ने मुझे वह सब्र दिया, जो हर किसी के हिस्से में नहीं आता।

अगर कोई शख़्स किसी हुक्म की तामील या किसी इम्तिहान में एक घंटा ठहर सकता है, तो मैंने ज़िंदगी से पाँच घंटे अडिग खड़े रहने का हौसला सीखा है। यह हौसला अचानक नहीं आया। इसे वक़्त ने गढ़ा और मेरे आसपास के उन लोगों ने आकार दिया, जिन्हें दुनिया मार्गदर्शक या मेंटर कहती है।

लेकिन ज़िंदगी का अजीब तमाशा देखिए—

जिन्होंने मुझे सब्र के सबक पढ़ाए, वे खुद सब्र नहीं रख पाए।
जिन्होंने उसूलों की बातें कीं, वे खुद उन्हीं उसूलों से दूर खड़े मिले।

पहले यह दोहरापन चुभता था।

फिर समझ आया कि हर गुरु अपनी कही हुई बातों का उदाहरण नहीं होता।

उनकी कमज़ोरियाँ मेरे लिए शिकायत नहीं बनीं, आईना बन गईं।

उस आईने ने मुझे सिखाया कि दूसरों को दी गई सीख को सुनना आसान है, लेकिन उसे अपने जीवन में उतारना ही असली परीक्षा है।

मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा—
कुछ यह कि मुझे क्या बनना है,
और कुछ यह कि मुझे क्या नहीं बनना है।

शायद इसलिए आज मैं अपनी ज़िंदगी की हर कड़वी घटना को सिर्फ़ एक बुरा अध्याय नहीं मानता।

कुछ लोगों ने मुझे तोड़ा, ताकि मैं खुद को जोड़ना सीखूँ।
कुछ ने मुझे अकेला किया, ताकि मैं अपने साथ रहना सीखूँ।
कुछ ने मेरी क़द्र नहीं की, ताकि मैं अपनी क़ीमत पहचान सकूँ।
और कुछ ने धोखा दिया, ताकि मैं आँखें खोलकर रिश्ते पढ़ना सीखूँ।

यही ज़िंदगी का कड़वा शब्द है—
हर दर्द दुश्मन नहीं होता,
कुछ दर्द हमारी पहचान बनाने आते हैं।

आज के दौर में लोगों के पास पढ़ने का समय कम है और ठहरकर समझने का सब्र उससे भी कम।

इसलिए अपनी दास्तान को आज यहीं विराम देता हूँ।

किस्से अभी बहुत बाकी हैं—
कुछ लोगों के,
कुछ रिश्तों के,
कुछ ज़ख़्मों के,
और कुछ उन सबक़ों के जिन्हें वक़्त ने बड़ी ख़ामोशी से मेरी हथेली पर लिख दिया है।

जैसे-जैसे वक़्त फुर्सत देगा,
स्याही पन्नों पर उतरती रहेगी।

क्योंकि Kadwashabd की कहानी सिर्फ़ मीठी बातों की कहानी नहीं है।

यह उन अनुभवों की आवाज़ है,
जो पहले चुभे…
फिर समझ आए…
और आख़िरकार जीना सिखा गए।

Kadwashabd

कड़वा है, क्योंकि सच है।

शनिवार, 31 जनवरी 2026

मार्केटिंग कंपनी ठगी का बाजार या नए जमाने का कारोबार

पिछले कुछ महीने से मैने एक मार्केटिंग कंपनी को ज्वाइन किया, उस कंपनी के वेलनेस और एग्रो के प्रोडक्ट है। प्रोडक्ट बेहतर है इसमें कोई चर्चा का विषय नहीं,विषय चर्चा का है कि इन प्रोडक्ट को बेचने का तरीका। इस तरह के प्रलोभन दिए जाएंगे जो आपको दैनिक जीवन में कमी महसूस देते हो जैसे अच्छे टूर करवाना, डांस पार्टी इत्यादि। एक बार के लिए मन बहल जाता है लेकिन जब आप आदि हो जाते हो आपको इनका जबरदस्ती प्रोडक्ट बेचने या खरीदने का प्रेशर आपकी कमर तोड़ देता है। जहां आज के समय में लोगों के पहले ही रिश्ते बेहतर नहीं उन्हें ये बिल्कुल खराब कर देते है। जिस सामान की आपको आवश्यकता नहीं उस सामान को जबरदस्ती जिस जनकर को आप अपने भावनात्मक सम्बन्ध में बेच दोगे अगली पार वो आपसे और दूरियां बना लेगा।  कुछ प्रोडक्ट की अच्छाइयों का फायदा उठा कर आपके जीवन को तीतर बितर कर देंगे। इनको ट्रेनिंग में प्रशिक्षित इस तरह से किया जाता है कि लूटना इनका अधिकार है, और लुट जाना अपनों का भाग्य। मैने बहुत कुछ खो दिया इस काम में, अब मैं खुद का भी सम्मान नहीं करता। 
कौन नमक लौटा लेकर कसम खिलाएगा आप समझ सकते है जिसे डर हो कि उसकी दुकान बंद हो जाएगी अगर आप ने आना छोड़ दिया। इसलिए मैं किसी भी भले इंसान को व्यक्तिगत रूप से जाने की सलाह नहीं दूंगा अगर आपका काम ही हमेशा ठगी से चला हो तो ये आपके लिए बेहतरीन काम है। 
जय मार्केटिंग कंपनी। 

कड़वे शब्द बोलता हूँ