सोमवार, 30 नवंबर 2015

अक्स तलाशती ज़िन्दगी

अक्स तलाशती ज़िन्दगी ओझल हो गई है समस्याओ के काले बादलों में, कोई फुरसत का लम्हें की गुजारिश कर भी लूँ। कोशिशो के बावजूद फिर उसी चोराहे पर मिलता हूँ जहाँ रास्ते तो बहुत है, मगर मंजिल कहाँ होगी मालूम नहीं। हर जगह बेशक गलत हो सकता हूँ में, मगर मेरा दिल भी गलत है ये मालूम ना था। अक्सर सुना है दिल जो कहे वो किया कीजिये। कम्बखत भग दौड़ के ज़माने में हमारा तो दिल इम्तिहान में हार गया। मुझे किसी धर्म/जाति से कोई सारोकार नहीं। मेरी धड़कने एक ही भाषा की मुरीद है जो दिल से छूकर गुजरती हो। जब वो दिल को छूने वाली लहर भी कोई धोखा होने का एहसास दे तो आप के अंदर कोई ज़िन्दगी बाकि नहीं रहती।

रविवार, 8 नवंबर 2015

काव्य रस

काव्य मेरा रसहीन हो गया
जब से वो और भी हसीन हो गया

उसके लिए में ज़मीन
वो मेरा आस्मां हो गया

काव्य को मेरे हास्य जताता है
अपने रूप को सर्वोपरि दर्शाता है

जब से वो मेरे लिए अनमोल हुआ
मेरा स्वयं का मोल खो गया

#
वक़्त ही फल का रंग दिखाता है
अच्छे से अच्छा बदल जाता है

बुधवार, 21 अक्टूबर 2015

कविता

अभी टूट कर गिरा था
कि नए कोंपले फुट पड़ी

आँधी से जजर्र हुआ वृक्ष
नए अध्याय की और बढ़ चला

निशान अभी बाकि है क्षति के
बिखर सौ टुकड़े हुए मति के

हारी नहीं हिम्मत उठ खड़ा हुआ हूँ
लडख़ड़ा ही सही चलने लगा हूँ

फिर एक नया मौसम आएगा
मेरी शाखाओ से चमन लहराएगा

टूटी थी आस जिनकी
खुशियों का समां बंध जायेगा

ये टूटा हुआ दरख्त
फिर सम्भल जायेगा

शनिवार, 3 अक्टूबर 2015

बैसाखियों पर ज़िन्दगी

आसाँ नहीं होती
बैसाखियों पर ज़िन्दगी

मोहताज हो जाती है जिंद सहारे को
ढूंढ़ नहीं सकता किसी किनारे को

आसाँ नहीं होती
बैसाखियों पर ज़िन्दगी

लाचारी के आलम में अपने भी रूठ जाते है
दूसरों का बोझ उठाते वक़्त रिश्ते भी टूट जाते है

आसाँ नहीं होती
बैसाखियों पर ज़िन्दगी

दया की नजरें चुभती है इन आँखों को
वक़्त तोड़ नहीं सकता बेबसी की सलाखों को

आसाँ नहीं होती
बैसाखियों पर ज़िन्दगी
आसाँ नहीं होती
बैसाखियों पर ज़िन्दगी

#
मुझे भी बिन बैसाखी जीने की चाहत है
ये ही उम्मीद जीवन में एक राहत है

बुधवार, 30 सितंबर 2015

पहला प्यार

मोहित हो गयी हूँ मैं
जबसे लड़े उनसे नैना
अँखिया दरश गयी उनको
भूली भूख प्यास और चैना

सजदे में उसके पलकें झुक जाती है
और वो बेरहमी से क़त्ल किये जाता है
मेरी धड़कनो से होकर
दिल तक दस्तक दे जाता है

उसकी आहट से मेरी बेचैनी बढ़ जाती है
दूरियों से जाने क्यों मेरी उम्र घट जाती है

साजना भर ले बाँहों में, जी लूँ जरा
पहले प्यार का जाम , पि लूँ जरा

#
यौवन का पूर्ण श्रृंगार
उसका पहला प्यार
जीवन का आधार
इश्क़ का इजहार

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

सर्वोतम हूँ में

सर्वोतम हूँ में

इस दौड़ में
जानवर हो गया इन्सान
भले बुरे की छोड़ पहचान
हो गया हूँ महान

सर्वोतम हूँ में
इस दौड़ में
दुसरो को नीचा दिखाता गया
खुद का परचम लहराता गया
दिल को बहलाता गया

सर्वोतम हूँ में
इस दौड़ में
नशे में चूर हो गया था मय के
भूल गया था मायने भय के
बस दौड़े जा रहा था

सर्वोतम हूँ में
इस दौड़ में
कुछ अपने थे जो समझाते रहे
मेरे जहन से रुकावट समझ बहते रहे
वो फिर भी अपना कहते रहे


सर्वोतम हूँ में
इस दौड़ में
सर्वोतम हूँ में
इस दौड़ में

सर्वोतम हूँ में
इस दौड़ में

#
सर्वोतम की होड़ में
मंजिल पर अकेला होगा तू
दुनिया छोटी आएगी नजर
कोई बराबरी को नहीं होगा बेशक




सौदागर वो इश्क का

सौदागर है वो इश्क का
किस के हिस्से आएगा
तय करता है अपने पैमाने से

किसी को जिस्म का भूखा बताता है
तो किसी को रूह का शहजादा जताता है
सौदागर है वो इश्क का



बुधवार, 16 सितंबर 2015

बेगानो से अपने अपनों से बेगाने

नन्हें कदमो से चलना सीखा था
की बचपन छीन लिया
अपने और कुछ बेगानो ने

खेत खलिहानों की जगह ले ली
आलीशान मकानों ने
ऐसा छला मुझे अपने और कुछ बेगानो ने

वक़्त की रैना में वो बेगाने भी अपने हो गए
हम कुछ वक़्त के लिए हसीं सपनो में खो गए
लगने लगा है कि वो बेगाने भी अपने हो गए

रास ना आई मेरी खुशिया, अपनों की ही नजर लग गई
इस तरह हुयी विपदा की
जो बेगाने हुए थे अपने
आज फिर बेगानो सा हो गए

जो संजोये थे संग जीने के सपने
वो कहीं अपनों की खुशियो में खो गए
जो बेगाने हुए थे अपने
आज फिर बेगानो सा हो गए

#
क्या खेल जीवन ने है खेला
आगे बढ़ने को नहीं
पीछे हटने को नहीं

तथ्य:- एक दोस्त ने अपने दोस्त की वेदना सुनाई थी कुछ इस तरह ही व्यक्त कर पाया॥ हिम्मत ना हुयी कुछ और लिखने की

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

कुछ तो बात है

कुछ तो बात है
जो आँखों से दिल में उतर गया वो
साँसों में बस
ज़िन्दगी बन गया है वो

कुछ तो बात है
पल भर संग उसके
सादियो सा जी लेता हूँ में
कुछ लम्हों में
उम्र भर की चोट ले लिया करता हूँ मैं

कुछ तो बात है
मेरी तस्वीर
आँखों में लिए फिरता है वो
मेरी हर बात
दिल पर लिए आहें भरता है वो

कुछ तो बात है
लबो पर मेरा नाम आये
तो दुनिया से डरता है वो
मैं खामोश हो जाऊ गर
तो दुनिया से लड़ता है वो

कुछ तो बात है

शनिवार, 5 सितंबर 2015

सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर


सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
बेदर्दी से दौड़े जा रहा हूँ
ना आज होश है ना कल की खबर

दर्द के सिवा कोई मंजर नहीं
फिर भी बह गया हूँ रसधार में
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

नाउम्मीदें के आलम में एक उम्मीद जगाये बैठा हूँ
नफ़रत के माहौल में मोहब्बत लौ जगाये बैठा हूँ
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

तू बेशक मुझे तरह तरह के नाम से बुलाता है
पर मेरा दिल सिर्फ एक ही धुन समझ पाता है
तेरे लिए एक ही राग गुनगुनाता है
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

बतिया मुझे से तू घडी दो घड़ी
मेरी ज़िन्दगी की टूटे ना लड़ी
तेरे कदमो में मेरी जान है अड़ी
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
तेरे दिल को छु जाऊंगा
नफरत के समुन्दर को
मीठे पानी की झील कर जाऊंगा
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर
सवार हो इश्क़ के घोड़ो पर

#
ऐसा आया हूँ तेरे जीवन में
तोहफा समझ रब्ब का अपना बना लेना
ना पसंद आये तो बुरा सपना
समझ कर भूल जाना

सोमवार, 24 अगस्त 2015

बेड़िया है मेरे पाँव म बेड़िया है मेरे पाँव मे े

बेड़िया है मेरे पाँव मे बेड़िया है मेरे पाँव मे ं
जो झुलस गया इश्क़ की छाँव मे
खिलने था जहाँ वहां मुरझा गया

बेड़िया है मेरे पाँव मे
बेड़िया है मेरे पाँव मे

हर बाजी हारा हूँ
मोहब्बत के दांव में
मोहरा बन रह गया
शतरंज के प्यादों सा

बेड़िया है मेरे पाँव मे
बेड़िया है मेरे पाँव मे

हर शब्द कर देता है घाव
जो करता इलाज वो मर्ज बन गया
हर लम्हां उनको एक अर्ज बन गया

बेड़िया है मेरे पाँव मैं बेड़िया है मेरे पाँव मे

उसको देखा जब से, मिट गए सब चाव
भूख प्यास सब एक हो गए उसकी आस में
नफ़रत भी भूल गया मोहब्बत की तलाश में
बेड़िया है मेरे पाँव मे
बेड़िया है मेरे पाँव मे

#
वजह बेशक तू है हर दर्द की
आराम भी रूह को तेरी झलक से आता है
मैं आज भी उसकी आह भरता हूँ
वो बेशक मुझे बेवफा बुलाता है

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

उलझन भरी ज़िन्दगी

कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

मकसद नहीं
कोई इसका
फिर भी उलझाती है
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

बेमतलब का तमाशा
कभी आशा
कभी निराशा
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

कोई खींच लेता है
ख्वाहिशों को दबाकर
थोपी जाती है
उनकी मेहरबानियां
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

कोई सब कुछ लूटा देता है
कोई सब लूट ले जाता है
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

किसी ने सजदा किया
तो किसी ने किया रुस्वा
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

बर्दाश्त नहीं किसी को आह भी
कोई उम्र भर की चोट से उफ़ नहीं करता
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

किसी ने मतलब से अपनों को खो दिया
कोई बेमतलब गैरो को अपना बना गया
कभी मुस्कराती
कभी रुलाती
उलझन भरी ज़िन्दगी

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ज़िन्दगी की उलझनें हो जाएँगी कम
गर दिल से लगाना
और किसी को समझाना छोड़ दें

बुधवार, 12 अगस्त 2015

गीत :- ज़िंदा हूँ मैं जिंदा हूँ मैं

ज़िंदा हूँ मैं
जिंदा हूँ मैं

अभी मोहब्बत जो बाकि है
मेरे दिल को धड़काती है
कहीं से है थोडा गुदगुदाती
कभी कभी है थोड़ा रुलाती

ज़िंदा हूँ मैं
जिंदा हूँ मैं
इतना तो है ये बताती
मुझको है राह दिखाती

नफरत तो सिर्फ इंसान को जलाती
मोहब्बत ही है जो ख़्वाबो को सजाती
दो दिलों के रंग रूप धर्म के भेद छुपाती
बस मोहब्बत ही मोहब्बत जो दिल को महकाती

ज़िंदा हूँ मैं
जिंदा हूँ मैं
इतना तो है ये बताती
मुझको है राह दिखाती

कुछ अठखेलियाँ वो मुझको दिखाती
कुछ मेरी नजरें उसको है जताती
वो शर्मा कर, कुछ है छुपाती
पर मोहब्बत से नहीं है बच पाती

ज़िंदा हूँ मैं
जिंदा हूँ मैं
इतना तो है ये बताती
मुझको है राह दिखाती

हर पल उसकी साँसे है घबराती
कभी पुछु तो कुछ बहक सी जाती
दिल की आग वो लब पर नहीं लाती
बस एक झूठी मुस्कान बिखेर जाती

ज़िंदा हूँ मैं
जिंदा हूँ मैं
इतना तो है ये बताती
मुझको है राह दिखाती

#
एक मोहब्बत ने ही मुझे इंसान बनाया है
नहीं तो हर रहगुज़र ने नफरत से ही मिलाया है
बस दुआ है रब्ब से मोहब्बत के जाम ही लुटाना
नहीं तो नफ़रत से जला देगा ये जालिम जमाना

रविवार, 9 अगस्त 2015

क्यों आदत हो गई .......

क्यों आदत हो गई
मुझे तड़पाने की
बात बात पर रूठ जाने की

संजोता हूँ सपने तेरे संग
वक़्त बिताने के
तू ढूंढता है बहाने
मुझ से दूर जाने के
क्यों आदत हो गई .......

बेशक ये रिश्ता मेने बनाया है
दिल ने तेरे भी हामी भरी होगी
बेशक हमारी राहें जुदा होंगी
फिर भी ज़िंदा मोहब्बत होगी
क्यों आदत हो गई .......

गुजारिश है तुझ से इतनी मेरी
चाहे मुझसे मीलों दूर चले जाना
पर रिश्ता है जो, अंतिम सांस तक निभाना
किसी भी वहम को मध्य ना लाना
क्यों आदत हो गई .......

#
मैं कुछ भी कह जाता हूँ बेचैनी में
गर तुझे है चैन मेरे दोस्त
मेरी बेचैनी ने जो किया है सवाल
उसका हल भी ढूंढ लाना



शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

दास्ताँ ए इश्क़

सामने बैठे है हजूर
थोड़ा नजरों से दूर
कुछ वो मजबूर
कुछ हम मजबूर

हल्की सी मीठी मुस्कान
साँसों से छुट्ती मेरी जान
नजरें जो मिल बैठे एक बार
उनके हो जाते हम पर एहसान

दिल से दिल की है पहचान
जानते हुए भी है अनजान
कानो में गूंजते उसके स्वर
मिश्री सा हुआ जाता हूँ मधुर

बरस बीत गए उनको निहारते
हम है की नजरों से नहीं उतारते
वो है कभी, अपना कह नहीं पुकारते
कभी तो एक लम्हा मेरे संग गुजार
बिलखती रूह का हो जाये उद्धार

#
चोरी सीना जोरी का जो है ये खेल
इस से होता नहीं दो दिलो का मेल
उम्र भर की कसक सीने को रुलाती है
वक़्त बे वक़्त वो बहुत याद जो आती है

गुरुवार, 30 जुलाई 2015

कुछ शब्द

मोहब्बत बेइंतहा
वो नासूर हो गई
मेरी ये ही खता
मेरा कसूर हो गई

तू बेवफा है इतना कह
वो मुझ से दूर हो गई
उसकी दरियादिली और
मेरी बेवफाई मश्हूर हो गई

कसम से वो आठ पहर में
कुछ घडी तो हंसाता है
बाकि लम्हें बस रुलाता है

उम्र भर दिल में रखने का वादा करता है
पर जाने क्यों, सब से कहने से डरता है

उसूलों से बंधा है इस कायदे भरी दुनिया के
बस लम्हों में जीता है, उम्र भर के बोझ तले

#
पागल हो गया है दिल, कुछ भी लिख देता है
कभी अपनी किस्मत तो कभी उसकी तक़दीर

मंगलवार, 28 जुलाई 2015

जाने क्योंहर कदम वो

जाने क्यों
हर कदम वो
मुझे बेबस कर जाता है
होंठो से निकले तीरो से
मेरा सीना भेद जाता है
जाने क्यों
हर कदम वो
खुद की बातों से कर हैरान
मेरी बातों से परेशां हो जाता है
जाने क्यों
हर कदम वो
सिसकियां भर कर मुझे भी
खून के आंसू रुलाता है
जाने क्यों
हर कदम वो
मेरी हर बात से रूठ जाता है
अपने सपनो से
मेरी ख्वाहिशें धूमिल कर जाता है
जाने क्यों
हर कदम वो
मेरी साँसों की डोर सा
बंधा चला जाता है
महरूम हूँ में
जो वो भरपूर हुआ जाता है
जाने क्यों
हर कदम वो
अग्न से पीड़ित कर मुझे
खुद शीतल सा हुआ जाता है
मेरी आहट से ही
कंपकंपा जाता है
जाने क्यों
हर कदम वो
जाने क्यों
हर कदम वो
मेरा सुर्रूर
और मगरूर सा हुआ जाता है
#
नशे सा छा गया है तू बेशक मुझ पर
तुझ से बेहतर भी नशे है ज़माने में
बस दो जाम लगते है उन्हें भुलाने में

रविवार, 26 जुलाई 2015

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बजरंगी भाई जान॥

कुछ दिन पहले मेरे दोस्त  बजरंगी और बाहुबली में फर्क तय कर रहे थे। बिना देखे तब मेने कहा था की बजरंगी सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए है और बाहुबली एक धरोहर को दर्शाती है। में वहां कुछ गलत था। एंटरटेनमेंट के साथ बजरंगी एक संदेशात्मक फ़िल्म है। सन्देश दो देश के मोहब्बत ही नहीं। बल्कि आज जो हो रहा है हम अपने स्वार्थ में इतने खो गए है की मदद तो दूर उल्टा किसी मदद करने वाले की निष्ठा में हजार खामियां निकाल उसे भी रोक देंगे॥ मोहब्बत को एक आदमी और औरत के रिश्ते के इर्द गिर्द बांध दिया। जबकि असली मोहब्बत तो इंसान की इंसान से उसके दर्द से उसकी हंसी से उसके गम से है।

#काश वो मुकाम दुनिया में फिर लौट आए धर्म रंग भेद पर जानवर सा लड़ने वाला इंसान फिर इंसान हो जाये॥

शनिवार, 25 जुलाई 2015

कलियों सा बढ़ चला था मेरा मन फूल बनने से पहले ही मुरझा गया

कलियों सा बढ़ चला था मेरा मन
फूल बनने से पहले ही मुरझा गया

सींचा तो बहुत मेने मोहब्बत के नीर से
ज़ालिम की नफ़रत थी ऐसी झुलसा गया
कलियों सा बढ़ चला था मेरा मन
फूल बनने से पहले ही मुरझा गया

मर्यादा रूपी बाढ़ से, बचाया था मेने इसको
वहम का तूफ़ान था जो मिनटों में सब ढह गया
कलियों सा बढ़ चला था मेरा मन
फूल बनने से पहले ही मुरझा गया

विश्वास भरी रिश्तों की डोर से उसको बाँधा था
चंचल मन था उसका, जो एक लम्हें में डोर छोड़ गया
कलियों सा बढ़ चला था मेरा मन
फूल बनने से पहले ही मुरझा गया

#
अब पतझड़ के मौसम मुझको रास नहीं
क्योंकि बसंत आने की मुझको आस नहीं
हो सके कुछ सर्द लम्हें दें जाना
तपिश से अब कुछ पिघलने का विश्वास नहीं

बुधवार, 22 जुलाई 2015

एक दौर का अंत शब्दों के बाण से

आज मेने इस कदर शब्दों को निचोड़ा
एक ज़िन्दगी की शाखा ने साथ जो छोड़ा

खुद के हाथो से रिश्तों का कत्ल हुआ
मेरा वो तीखा शब्द था जिससे जख्म हुआ

खुशियों के आलम में जुबान अक्सर बहक जाती है
वापस आते नहीं शब्द, बस उनकी यादें रुलाती है

जीवन में जिह्वा का इस्तेमाल से पहले एक सवाल
कहीं कोई ना टूट जाए दिल, बस रखना इतना ख्याल

मौसम और भी आएंगे, जब आप ख़ुशी से इतराओगे
बहकते शब्दों से फिर किसी अपने को रुलाओगे

कोशिश मेरी है की खुद के दायरे बांध लूँ
किसी के हँसते चेहरे का लबो से न नाम लूँ

शब्दों का चयन ही मुझको, इंसान बनाएगा
वरना बहकती जिह्वा से, शैतान हो जायेगा

#
बस तक़दीर लिखता है बेशक वो खुदा
कभी खुद के शब्दों से भी अपने होते है जुदा

कड़वे शब्द बोलता हूँ