मंगलवार, 23 सितंबर 2014

Dil ke kone se......................: रोक ले मुझे में जहाँ चला जा रहा हूँ किसी शोक से बं...

Dil ke kone se......................: रोक ले मुझे में जहाँ चला जा रहा हूँ किसी शोक से बं...: रोक ले मुझे में जहाँ चला जा रहा हूँ किसी शोक से बंधा चला जा रहा हूँ मुझे भी मालूम नहीं हश्र क्या होगा इस राह का, बस आंखें  बंद किये चल रह...

शनिवार, 15 मार्च 2014

मेरे सपने बेरंग

सपने तो में बहुत लेता हूँ पर कैसे उनको पूरा किया जाये उस पर कभी काम नहीं किया। इसलिए आज परेशानियो का सामना कर रहा हूँ। या ये भी कह सकते हो मेने सिख ही नहीं की कैसे अपने शब्दों को अकार दिया जाता है। मेरे दोस्त कुछ मुझ से आगे निकल गए और कुछ बहुत आगे निकल गए। शायद उनके लक्ष्य निर्धारित थे। और मेने अपने जीवन को उन मुद्दों में भटका दिया जहाँ पर पैसा और तरक्की नहीं थी। मुझे आप से ये ही कहना है की जीवन में आप को शौक पूरे करने का बहुत वक़्त मिलेगा पर एक बार जीवन में वो मुकाम हासिल कर लेना जिस से यर समाज आप को सलाम करे।।

हो तुझ में वो कशिश
की मुरादे भी तुझ से पूछ पूरी हो।।

सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

तमाशा

कुछ की जिंदगी भी एक तमाशा होती है। मेरा एक भाई नेता है पिछले दिनों में उसके पास गया था उसने मुझे कहा मेरे साथ चलोगे।
में असमंजस में फिर भी साथ चल ही दिया।
पहले हम एक मुहरत पर पहुंचे दूकान के और फिर किसी के मकान के।

यहाँ तक तो फिर भी ठीक रहा अब बारी आई किसी के अंतिम क्रिया में जाने की।
मुझे तो आश्चर्य हुआ की अभी तो हम किसी की खुशियों को बाँट रहे थे और अब गम।।
कैसे आखिर
चार पल पहले जब हम किसी के मुहरत में थे तो हमे ज्ञान था की हमे किसी की मौत पर भी जाना है। तो क्या ये सिर्फ रस्म अदायगी होती है।
जन्म हो या मृत्यु एक सामाजिक व्यक्ति को चेतना को ख़तम कर के सिर्फ जाने का ही फ़र्ज़ पूरा करना होता है ।
या वाक्य में वो इतना सहनशील हो जाता है की उसे सुख और दुःख में सामंजस्य बिठाना आ गया।
मुझे तो काफी अटपटा लगा शायद में यूँ जाता नहीं।
जो भी हो जीवन के ही रंग है ये।।

बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

ख़राब है

लिखने का बाद ही पता चलता है की आप के दिल से कौन सा ब्रह्मास्त्र निकलने वाला था
क्योंकि आप का मन इतनी उधेड़ बुन में रहता है जाने किस कोने से कोई गहरा राज/दर्द निकल आये किसी अपने को छू जाये।
rockstar मूवी में कहते है दर्द पैदा करो तब आवाज में  रस आएगा यहाँ तो दर्द ही है पर आज दर्द से दूर भागते है सब। मजाक बन गयी जिंदगी और मजाक बन कर रह गया है

रविवार, 13 अक्टूबर 2013

अलफ़ाज़ मेरे

कभी तू पागल
कभी में पागल
जिंदगी हो गयी दुस्वार
न तेरा प्यार
न मेरा प्यार
तेरा वजूद मेरी मोहब्बत
मेरा वजूद तेरी नफरत
मेरे आंसू और तेरी हंसी
मेरे शिकवे तेरे बहाने
वो अनजाने लम्हे
तेरे रास्तो पर बिताये
होंठो की मुस्कान को
अपने किस्से बनाये
हर कोने का ताना
पर तूने न मुझे जाना
लिखू स्याही लाल से
खून में वो बात नहीं
जब से फेरे डाले तेरे
यार टूट गए बतेरे

बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

tohfa

मेरे चाचा और चाची ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में रहते है पिछले दिनों मेरे दादा जी और दादी जी उनके पास गए थे।

उनके आने पर उनके साथ उन्होंने एक फ़ोन मेरे लिये भेजा
मेरा दिल भर आया एक तरफ जहाँ मेरा विश्वास दुनिया से उठ चूका था वही में सोचने लगा की ऐसा क्यों?

शायद उस कुदरत ने ही लिख दिया मेरी तकदीर में की जीना सिर्फ दुसरो के लिए । फल समय देगा पर तू अपने करम में लगा रह। मेरा पैर बहुत जल्दी उठता है मदद के लिए पर कभी कभी परिवार की जिम्मेवारी आड़े आ जाती है ।

मानता हूँ खुद के लिए भी कुछ करना होता है पर क्या इतना कुछ काफी नहीं होता की हम बहुत कुछ औरो के लिए करते है ये और बात कुछ ऐसे भी है जिनके लिए कितना कर लो पर वो आप को बुरा ही कहेंगे।।

पर ऐसे तोहफे मिलते रहे मेरे होंसले बढते रहे औरो की सेवा में।।

बुधवार, 2 अक्टूबर 2013

ब्लाह ब्लाह ब्लाह

पता है

आप को कैसे पता होगा मेने बताया तो नहीं ना
मेरा एक दोस्त ट्वीटर पर कहता आप बहुत अच्छा लिखते हो ब्लॉग


में खुश भाई चलो किसी ने तो अपनी कदर की।
मेने ख़ुशी में हिंदी में उसको टवीट किया।।

पता है क्या उत्तर आया

सोचो

सोचो

कहता की मेरे फ़ोन पर हिंदी भाषा नहीं आती अंग्रेजी में ट्वीट करो।।

भला मेरे ब्लॉग भी तो हिंदी में थे वो कैसे पढे मेरे चश्मे से पढे होंगे शायद

अब दो बातें है

या तो वो सब से अच्छा दोस्त है मुझे खुश देखना चाहता है

या

रहने दो जो पहले वाली सच हुयी दूसरी बात की जरूरत ही क्या।

हर किसी का।।।।।।

कोई अच्छा है तो कोई बुरा है ।
कोई माखन है तो कोई छूरा है
किसी की नियत ख़राब है
किसी की सूरत ख़राब है
किसी का धरम महान है
किसी का करम महान है
किसी का बेटा लायक है
किसी का बाप विलायत है
किसी का रंग काला है
किसी का रूप निराला है
हर किसी का कुछ होता है
हर कोई फिर भी रोता है
क्योंकि इंसान भूखा होता है

आखरी वक़्त भी भूखा सो जायेगा
फिर भी किसी का गला काट रोटी लायेगा
खुद भी खायेगा और नन्हो को भी खिलायेगा
फिर किसी मंदिर मस्जिद की चोखट जायेगा
अपने कर्मो पर पर्दा डालने का क़र्ज़ चुकाएगा
अगले दिन जायेगा और नया गला लायेगा
पर अपनी हरकत से न बाज आएगा
इंसान इंसान न होकर पशु हो जायेगा
कुछ कर ले आखिरी वक़्त एक दिन आएगा
और तू भूखा चला जायेगा।।।।।।।।।।।।।

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013

लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर प्रकाश

लालबहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर सन्‌ 1904 ई. के दिन वाराणसी जिले के छोटे से गांव मुगलसराय में हुआ था। सामान्य शिक्षक का कार्य करने वाले पिता शारदा प्रसाद मात्र डेढ़ वर्ष की आयु में ही बालक को अनाथ करके स्वर्ग सिधार गए। माता श्रीमती रामदुलारी ने ही ज्यों-त्यों करके इनका लालन-पालन किया। बड़ी निर्धन एवं कठिन परिस्थितियों में इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण की। बाद में वाराणसी स्थित हरिशचंद्र स्कूल में प्रविष्ट हुए। सन्‌ 1921 में वाराणसी आकर जब गांधी जी ने राष्ट्र को स्वतंत्र कराने के लिए नवयुवकों का आह्वान किया, तो उनका आह्वान सुनकर मात्र सत्रह वर्षीय शास्त्री ने भरी सभा में खड़े होकर अपने को राष्ट्रहित में समर्पित करने की घोषणा की। शिक्षा छोड़ राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े और पहली बार ढाई वर्ष के लिए जेल में बंद कर दिए गए। जेल से छूटने के बाद राष्ट्रीय विचारधारा वाले छात्रों के लिए स्थापित काशी विद्यापीठ में प्रवेश लेकर फिर पढ़ने लगे। वहां पर इन्हें डॉ. भगवानदास, आचार्य कृपलानी, श्रीप्रकाश और डॉ. संपूर्णानंद जैसे शिक्षक मिले। जिनके निकट रहकर इन्होंने स्वतंत्र राजनीति की शिक्षा तो प्राप्त की ही, शास्त्री की उपाधि या डिग्री भी पाई और मात्र लाल बहादुर से लालबहादुर शास्त्री कहलाने लगे।शिक्षा समाप्त कर शास्त्री जी लोक सेवक संघ के सदस्य बनकर जन-सेवा और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए कार्य करने लगे। अपने कार्यों के फलस्वरूप बाद के इलाहाबाद नगर पालिका एवं इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के क्रमशः सात और चार वर्षों तक सदस्य बने रहे। बाद में उन्हें इलाहाबाद जिला कांग्रेस का महासचिव, तदुपरांत अध्यक्ष तक मनोनीत किया गया। प्रत्येक पद का निर्वाह इन्होंने बड़ी योग्यता और लगन के साथ निःस्वार्थ भाव से कर के आम जनता और उच्च नेता वर्ग सभी का मन मोह लिया।आम साधारण व्यक्ति से भी साधारण व्यक्तित्व, एकदम साधारण परिस्थितियों और वातावरण में जन्म लेकर असाधारण एवं युगपुरुषत्व को प्राप्त कर लेना वास्तव में बड़ी ही महत्वपूर्ण बल्कि चमत्कारपूर्ण बात कही एवं स्वीकारी जा सकती है। चमत्कार करके साधारणता से असाधारणता प्राप्त कर लेने वाले व्यक्तित्व का नाम है लालबहादुर शास्त्री, जिसने नेहरू के बाद कौन जैसे प्रश्न का उचित समाधान प्रस्तुत किया। साथ ही अपने अठारह मास के शासन काल को भी अठारह सदियों जैसे लंबे समय के गर्व एवं गौरव से भर दिया

लाल बहादुर शास्त्री

आज जन्मदिन है उस महान आत्मा का जिसने गाँव की पृष्ठभूमि से चलकर देश की प्रधानंमंत्री के पद को सुशोभित किया। कोई भी पक्ष या विपक्ष का उनके व्यक्तित्व पर सवाल नहीं उठा सकता। उनके बारे में भी कुछ ज्यादा नहीं जनता क्योंकि कभी पाठ्य पुस्तको में इतना ज्यादा लिखा नहीं था। और कभी लाइब्ररी में जाकर पढने का शोक नहीं हुआ । पर जितना सुना और पड़ा वो एक कर्मठ व्यक्ति थे
नदी पार करना और एक दिन का व्रत रखना जैसे किस्से उनके बारे में काफी कुछ बता देते है। मेरा आप सब से ये आग्रह है की आप संकल्प ले की लाल बहादुर शास्त्री के नक़्शे कदम पर न सही पर उनके जीवन से कुछ प्रेरणा जरूर ले
जय जवान जय किसान

ट्वीटर

एक ऐसा वर्ग जिसे शायद मोहल्ले में या ऑफिस में या कही भी मौका नहीं मिलता अपने दिल का अरमान। जहर उगलने को वो ट्वीटर पर आसानी से व्यक्त कर देता है अच्छा भी है मन निर्मल हो जाता है । हल्कापन आ जाता है कोई चिंता नहीं रहती लगता है हमने पप्रोटेस्ट यही कर दिखाया हो । कुछ मित्र इतना अच्छा लिखते है की ट्वीटर छोड जाने का मन नहीं करता और कुछ ऐसे भी है जिनके संग निभाने का मन नहीं करता । पर जैसा की हमेशा सिखाया जाता है बुराई तज कर अच्छाई को अपनाना चाहिए । ताकि हमारे अंतर्मन पर कोई दुष्प्रभाव न हो। और हम निरंतर अपने लक्ष्य की तरफ बढते जाये। आप को लगता होगा की में कैसी बातें लिखता हूँ आप को तो सब पता है। पर एक बात कहूं दावे से हर किसी को पता होता है जब कोई बुरा या अच्छा काम करता है पर फिर भी करता है। सब हेराफेरी करते है थोड़े मुनाफे के लिए उस वक़्त चलता है कहकर पल्ला झाड़ देते है अपने सब गुनाहों से। मेरा मकसद ट्वीटर पर अच्छे लोगो से बातें करना और अच्छे लोगो की भावना को प्रबल बनाना ताकि जो कुछ बचे है वो विरासत ही सरंक्षित रह जाये ।।
नमस्ते ।।

शनिवार, 28 सितंबर 2013

सच्चा प्यार

आज का नहीं सदियो से है ये समाज में एक अनोखा विषय जिस से समाज में अपनाता तो कोई नहीं पर उम्र के एक पड़ाव सब के जीवन में आता है जब उसके आगे पीछे प्यार की महक उठती है उसे फिजा का हर रंग गुलाब सा लगता है उसको लगता है वो ही है बस और उसका प्यार बाकि सब बेकार

पर सवाल उठता है की इसका फैसला कौन करे जो प्यार उसे हुआ है वो ही सच्चा है आखिर सच्चे प्यार की परिभाषा क्या है । मुझे तो मालूम नहीं पर इतना मालूम है ।

बरसो से जिसने (परिवार)हमारे सुख दुःख का खयाल रखा उनको छोड़ प्यार पाना तो नहीं
किसी दुसरे से की खुशिया छीन कर अपना घर बसना तो सच्चा प्यार नहीं
इतनी हद से गुजर जाना की पाने के लिए किसी की जान लेना भी प्यार नहीं
अपनी मोहब्बत को किसी पर थोप देना भी प्यार नहीं

और समाज और परिवार भी जिंदगी भर सब देने के दावे करते है पर प्यार की बारी आये तो दुश्मन बन जाते है वो भो सच्चा प्यार नहीं

त्याग तपस्या और इंसानियत की भावना को मार कर कुछ भी करना सच्चा प्यार नहीं बाकी सब व्यापार सिर्फ इंसानियत सच्चा प्यार

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

जब कभी दिन ढल जाये

अक्सर हम थोड़ी सी परेशानिय देख अपना आप खो कर दुसरो पर ऊँगली करने लग जाते है पर ये अशोभनीय है
उतार चड़ाव धुप छाँव सुबह शाम जीवन का अभिन्न हिस्सा है
कभी दिन कभी रात कभी झगडा कभी बात
कभी जुदाई कभी साथ ये सब नहीं होगा तो जीवन नीरस और बेमानी हो जायेगा सब अच्छा होगा तो आप को दर्द का एहसास नहीं होगा और न ख़ुशी के मतलब
जिसे फ़ैल होने का डर होता है पास होने पर उसे ख़ुशी मिलती है न की जो पहले निश्चिन्त था उसे
अँधेरे अक्सर आते है जीवन में पर तू घबराना नहीं
ये मोड़ है अक्सर पार करने पर नै सड़क का निर्माण करते है

में दुःख और सुख दोनों की चरम सीमा से गुजर चूका हूँ और दोनों को भरपूर जीता हूँ ताकि दोनों के स्वाद में फरक न पड़े और मेरी आप से भी विनती है की जीवन को सरल बनाए कठिनता लाने का काम दुसरो पर छोड़ दीजिये जो हमेशा आप के रस्ते में रोड़े डालने की फिराक में रहते है

रविवार, 22 सितंबर 2013

मेरी और तेरी

मेरी भावनाओ की कद्र करना
कभी मेरे सपनो में रंग भरना
कभी मेरा साया बनना
कभी मेरा हमराज
कभी न हो नाराज
तू मेरा आज
तुझ से मेरी आवाज
तुझ से मेरी साँसे
तुझ से मेरा सरमाया
तुझ से मोह माया
तुझ को ही बसाया
तुझ ने ही रुलाया
तेरे आंसू मेरा दर्द
तेरा जखम मेरा लहू
तेरी सांस मेरा जीवन
तेरी बातें मेरा सकून
तेरी ख़ामोशी मेरी बैचैनी
तेरी ख़ुशी मेरी जन्नत
तेरी चाहत मेरी दुआ
तेरे सपने मेरी कुर्बानी
तेरा इन्तजार मेरी जवानी
तेरा इनकार मेरी कहानी

होश संभालो मेरे यारो
किसी की मोहब्बत के मारो
समझो वक़्त की नजाकत
इश्क की नहीं हुस्न की है ताकत
जलाता इश्क नहीं हुस्न है
इसकी गर्मी में ही घुटन है
प्यार की ठंडी हवा में लगती है मोहक
नशा उतरने पर फ़ना कर देती

फूलो की महक अक्सर बहकाती है
पर पेट की आग नहीं बुझाती है

शनिवार, 21 सितंबर 2013

अँधेरे की और

जब भी हम जीवन में सफ़ल नहीं हो पाते तो हमे सब तरफ अँधेरा नजर आता है ऐसे में निराशावादी सोच के कारण हमारा हर फैसला हमे अँधेरे की और धकेल देता है

समस्या इतनी नहीं है आप के आसपास के लोग भी आप को हिम्मत देने की बजाये तोड़ने का काम करते है अक्सर ऐसे मौको पर उन बातों से ज्यादा निराशा होती है जिनसे जीवन में कोई सरोकार भी नहीं होता
जैसे आप एक रसोइये है और आप को लगने लगता है की आप को गाली चलानी नहीं आती जिन का आपस में दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं वो बातें कचोटने लगती है आप का दिमाग ख़राब कर देती है
अब आप कहेंगे की इन सब बातो से बचने का तरीका क्या है तरीका बहुत मुश्किल है क्यों की उस तरीके में समाज द्वारा आप को लापरवाह वगेरे वगेरे तमगे दे दिए जाते है की आप ने इतना सा भी ध्यान दिया तो भी आप की हार है
तो हम बात कर रहे थे की अँधेरे से कैसे बचा जाये सिर्फ रौशनी जल कर विश्वास की रौशनी भरोसे की रौशनी अपने अंदर के जूनून की रौशनी जो बुरा हो रहा है उस पर शयन न देकर ये सोचे की आप का नंबर अभी नहीं आया आप का भी वक़्त आएगा आप ने बस करम करते रहना है सफलता के लिए कार्य करना अति आवश्यक है अगर आप को बोरियत हो थोडा सा ध्यान लगाये उन बातो नें जिनसे आप को सची ख़ुशी मिलती हो जैसे किसी को टेलीविज़न देखना किसी को इन्टरनेट करना या और भी कोई अची या बुरी आदत जिस से दिमाग को सकूं मिले
बस मुझे इतना आता था आप के साथ बांटा
नमस्ते
आप का विकास सिंह चोपड़ा

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

Khap, Women & society

आज एक प्रोग्राम देखा NDTV पर दूसरी बार , एंकर ने एक बात  जो मुझे आधारहीन लगी . उन्होंने कहा समाज कौन  है मेरी व्यक्तिगत जीवन  में दखल देने वाला . समाज कौन होता है बंदिशे लगाने वाला।

में ये नहीं कहता की मेरे तथ्य ही ठीक है मेरे में अपने विचार जरूर पेश करना चाहूँगा
सब से पहले समाज से दूरियां बनाने का नुक्सान ये है की हम कुछ बुरइयो के शिकार हो जाते है।


जैसे की किसी भी एरिया में परिवारों के साथ वाले घरो में कोई लिव इन रिलेशन वाले रहते है तो परिवारों को इस बात पर ऐतराज़ होता है। और ये वो परिवार होते है जो अच्छे से शिक्षित और उच्च पदों पर या आचे व्यपारी होते है। उनको डर होता है की उनके बच्चो पर इसका  बुरा असर पड़ेगा लेकिन हमारे न्यायलय का नजरिया / फैसला इस से विपरीत होगा


और ये सोच जिस में की समाज को हमारे जीवन में दखल देने का हक नहीं का सब से बड़ा नुक्सान देखने को मिलता है जहाँ इस विचारधारा के लोग रहते है जिनकी वजह से अगर पास वाले घर में कोई झगडा / चोरी या कोई अन्य अपराधिक घटना हो रही हो तो कोई नहीं जाता क्या ये ही है इंसानियत . जब की गाँव व् अन्य जगह जहाँ लोग आपस में एक दुसरे की जिंदगियो में दखल देते है वहां ये घटनाये बहुत ही कम है मेरी तो ये ही राय है उन एंकर से की वो 100 करोड़ से अधिक लोग को अपनी बात पहुंचा रहे है कही उनके इन विचारो से समाज टूट जाये और इस तनाव के दौर में और अकेले हो जाये .

और बात हुयी थी औरतो के हक की तो शायद दुनिया में हम से ज्यादा सम्मान भी औरतो का कोई नहीं करता एक मेरे देश ही है जिसके समाज ने औरत को देवी माना है

और में खप का हिमायती नहीं हूँ और ना विरोधी में , हर उस बात का हिमायती हूँ जो इंसानियत या हमारी आने वाली नस्लों को अमन और ख़ुशी से भरी विरासत दे।

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

अकेलापन

zindgi में एक khamoshi aur udaasi chaayi huyi है, jane kyon ander से कुछ toot raha है


aisa lagta है की में arsh से farsh की aur bad raha हूँ , जीवन के sare raste खो से गए हो, एक धुंध है जो dheere dheere  meri मंजिलों पर parda daal रही है.

sare milkar jaise मुझे mitti में milana chahte हो, aise waqt पर koi एक भी इंसान नहीं जो मुझे सहारा दे सके, मेरे जीवन की हमेशा ही ये त्रासदी रही है की मुझे कभी किसी ने सहारा नहीं दिया. रेंग रेंग कर मेने एक chothai जीवन gujar दिया aaj की umar dekhe तो लगभग आधा जीवन ही sangharsh की bhent chad gaya. haan कभी कभी कुछ thandi hawa के jhonke aaye पर un jhonko के baad , us से kahi jyada jhulsana pada waqt की tapis में. maloom नहीं kab मुझे wo sukh milega jis के लिए में जीता हूँ हर din एक कड़वा लम्हा पीता हूँ ये soch की is रात की भी सुबह आएगी मुझे भी कुछ bunde जीने की कला सिखाएगी.

लाचारी

kudrat ne mera aisa majak bana diya na jeene mein naa marne mein,


marne ki sochta hoon to wo chehre yaad aa jate hai jinke liye jeevan mein kuch nahi kiya aur jeene ki sochta hoon to har pal koi na koi meri lachaari ka majak udata mil jata hai aisa dard akhir kab tak jhelna padega. meri galti kya hai ki mein kaminepan ki zindgi nahi g sakta mene bahut koshish ki bura bhi banane ki par jane kaun c takat mujhe mana kar deti hai. rok deti hai mujhe. berojgaari ya bekkaari ne mujhe aisa bana diya ki mujhe kuch najar nahi aata. kash ye akal 2003 mein aa jati jab jetking se course kiya tha tab job kar leta to aaj kisi ke muh ko takna aur kisi ki jali kati nahi sunani padti wo log bahut ache hote hai jo parivaar ki sunte hi nahi. jinki dhun baspaisa kamana hoti hai akhir mein unko hi duniya salam karti hai. mujhe shakti do bhagwaan aur sadbudhi taaki mein in kathin daur ko aasaani se paar kar sakoon,

रविवार, 2 सितंबर 2012

Dard

Dooba rom rom mera teri yadon mein.  Har pal rahti ho meri fariyadon mein.

Jane kyon mujhe dard dene aur dard hone ka gourav mila hai kudrat se. Har din har lamha,  har pal bus ehsaas karaya jata hai ki mein bahut bura insaan hoon.  Meri acchai bhi meri khamiya ban gayi,  meri jaise ki rooh hi jal gayi ho,  khushi ki to shayad lakeere hi nahi di mujhe halanki mein doston ki mehfil mein khushiyon ki talash mein jata hoon par wahan bhi nirasha hi milti hai. Dosto ki mehfil mein bhi mein majak lagta hoon kyon ki na un jaisa ban pata hoon aur naa khushi milti.  Har mehfil aur har jashan mein khushi ke mayne alag hi hote hai.  Isliye mujhe jo khushi chaihiye mujhe khud nahi pata isliye milti nahi.  Mere apne mujh se itne dukhi hai zindgi se nikal jane ki batein karte hai.  Mera aham ya swabhimaan ya nirkunsh ya nikkma ya koi bhi naya naam mujhe naya nahi lagta is fast jamane mein mere jaise machine ki koi jaroorat nahi.  Mujhe to sirf aap apni bhadas ya apna
Yahan shayad apna ya apnepan jaisa kuuch jeevan mein baaki nahi

कड़वे शब्द बोलता हूँ