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गुरुवार, 16 जुलाई 2015

धुंआ है ये मोहब्बत

धुआँ है ये मोहब्बत
एक बार बहुत नजर आती है
एक हवा के झोंके से
कहीं खो जाती है

मन होता बावरा जब तक धुआं होता है
और कुछ इसे नजर आता नहीं

मंगलवार, 14 जुलाई 2015

वो

खिलौना बना था जो किसी का
आज मुझे खिलौना बनाता है

चाबी से चलता था जो
वो आज चाभी घूमाता है

शायद भूल गया है अपने दुःख
जो मेरे सुख चुरा ले जाता है

मुझे दो आँसू, खुद के सकूँ के लिए

कड़वे शब्द बोलता हूँ