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सोमवार, 25 मई 2015

जाने क्यों

जानें क्यों उसको कुछ तो है गम
फिर नजर आई उनकी आँखें नम

यूँ ही बरस जाता है वो बिन बरसात सा
भिगो जाता है मेरा मन, उसकी करुणाइ से

डरता नहीं जो दिल कभी किसी ज़ख्म और चोट से
मोम सा पिघल गया, क्यों उसके आँखों की मायूसी से

कोई गुनाह तो मुझ नाचीज से हो गया
इसलिए वो बंद आँखों से ज्यों रो दिया

आलम तन्हा रोज रोज मुझ से सहा जाता नहीं
खुशियो से डरता है मेरा मन, दर्द से घबराता नहीं

रविवार, 17 मई 2015

खिल गया वो मेरे मन में फूल की तरह

खिल गया वो मेरे मन में फूल की तरह

बस डर है इतना
मुरझा ना जाना कहीं
उस फूल की तरह

खिल गया वो मेरे मन में फूल की तरह

खुशबू से तो जग महकेगा तेरी
पर किसी की झोली ना जाना
उस फूल की तरह

खिल गया वो मेरे मन में फूल की तरह

आँखों से तो सब निहारेंगे बेशक तुझे
पर किसी के चरणों की भेंट ना बनना
उस फूल की तरह

खिल गया वो मेरे मन में फूल की तरह

फूल से फल बन, ज़िंदगी को महकाना
चंद रोज में तन्हा ना कर जाना
उस फूल की तरह

कड़वे शब्द बोलता हूँ