मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

प्रेम, गुलामी व खजाना

प्रेम
समय समय इसकी परिभाषा और अर्थ मनुष्य ने , अपनी समझनुसार अथवा परिस्थितियों के अनुसार बनाये है,

मेरा भी कुछ मत है, भिन्न हो सकता है लेकिन व्यर्थ नहीं है, आज हम जिस पुरुह समाज को स्त्री के दमन का सबसे बड़ा कारण मानते है वो भूल जाते है कि बहुत के गर्भ में क्या घटित हुआ कि आज समाज में ये हालात है, कोई भी पौराणिक कथा अथवा उपन्यास में औरत पर अत्याचार की दास्तान नहीं सुनाई गई, लेकिन शिष्टाचार के नाम पर कुछ नाइंसाफी अवश्य हुई है।

मतलब कि पहले स्त्री को इतना प्रेम किया जाता था या सम्मान दिया जाता था वो धीरे धीरे आन बान और शान का विषय बन गई, फिर वक़्त के साथ वर्चस्व की लड़ाई में शान के अहंकार में , जीव से कब अमूल्य वस्तु बन गई शायद मानव को भी पता नहीं चला, कब स्त्री प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गई। उसके शरीर की पवित्रता को परिवार का अभिमान और पुरुष के दमन को शौर्य माना जाने लगा। हालांकि कुछ बुद्धिजीवी इसका ठीकरा अन्य धर्म व जातियों पर फोड़कर, स्वयं की ग्लानि से बचना चाहते है, और ये भूल जाते है कि अच्छा और बुरा हम हमेशा अपनी सुविधानुसार धारण करते है।

एक व्यक्ति हेलमेट पहनने में सुरक्षित महसूस करता है दूसरा न पहनने में खुद का गौरव, आप उन दोनों से सिख स्वयं की सुविधा के हिसाब से ही लेते हो। जैसे आपको सरल व सुविधाजनक लगेगा आप वही रास्ता चुनोगे।  अथार्त कब स्त्री को अमूल्य वस्तु बना दिया गया यह समाज को खुद भी पता नहीं चला, बस अहंकार और झूठी शान की वजह से खुद को बदलते गए।

इतिहास में मुझे लगता है गुलाम और मालिक का संबंध ही वास्तविक प्रेम को दर्शाता है अन्यथा सभी प्रेम काल्पनिक व लघु समय की जरूरतों से पनपते है। जबकि गुलाम शोषित होने के बावजूद बरसों तक अपने मालिक की निस्वार्थ समर्पण करता है। मानव की मूल भावना ही ग़ुलाम वाली है। यह नहीं कि केवल गुलाम ही शोषित होता है, वह गुलाम भी अगर अपनी पत्नि और बच्चों से ठीक वैसे व्यवहार की अपेक्षा रखता है जैसा उसका उसके मालिक के प्रति है। अथार्त मानव की मूल भावना ही शोषण कर, प्रेम प्राप्त करना है।

हम कहते है घर में अक्सर झगड़े होते है क्योंकि प्रेम नहीं होता, प्रेम नहीं वहाँ किसी का शोषण नहीं होता, अगर कोई शोषित हो तो उस घर में आपको अपर सुख नजर आएगा, अब महिलाओं के शिक्षित होने के उपरांत उनकी बराबर की भागीदारी में आने के कारण ही पुरुष के अहम को चोट पहुंची है इसलिए परिवारों में तनाव रहता है, वहीं जो पुरुष झुककर शोषित होना स्वीकार कर लेता है वही घर स्वर्ग हो जाता है,

प्रेम वह गुलाम भावना है जो आपको निज हित त्याग कर किसी विशेष के लिए समर्पित हो जाना है।

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