रविवार, 15 जुलाई 2018

चॉकलेट की जैसी हो तुम

चॉकलेट की जैसे हो तुम

घुल जाती हो, होंठो से लगाते ही
ख़ुमारी छा जाती है नशे सी
चॉकलेट की जैसे हो तुम

कभी कभी कड़वी भी लगती हो
पर आदत है कि छूटती नही तुम्हारी
चॉकलेट की जैसे हो तुम

महँगी भी बहुत हो,
इसलिए अक्सर ख़्वाहिश मिटा देता हूँ
खुशबू से महक लेता हूँ
चॉकलेट जैसे हो तुम

बर्दशात नहीं होता, जब तुम किसी के पास हो
मेरी आँखों में नमी होती जब उदास हो तुम
खुशी को तेरी दूर चला जाता हूँ
यादों में खुद को भी भूल जाता हूँ
बिल्कुल
चॉकलेट जैसे हो तुम

लिखता तुम से हूँ, तो औरों की क्यों बात करते हो
इरादे तुम बदल लेते हो, मौसमी समाज से डरते हो
फिर मेरी खामोशी पर आहें भरते हो
चॉकलेट जैसे हो तुम

मालूम नहीं कब पढ़ते हो मेरे अल्फाज़
तुमसे बात कहने का एक ये ही है अंदाज
मेरी पहुँच से दूर हो गए हो तुम
चॉकलेट जैसे हो तुम

महंगे और शौकीन
खुशबू और हसीन
चॉकलेट जैसे हो तुम

कभी कड़वे तो कभी मीठे
नशा वन रगों में बस जाते हो
हाँ तुम ही तो
चॉकलेट जैसे हो तुम

#दोस्त #दुश्मन

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कड़वे शब्द बोलता हूँ