सबसे पहले हम बात करते है पानी की
पानी जो आज बोतल में हर चौराहे की दुकान पर मिल जाता है वो आज से 30 बरस पहले यूं कह लीजिए 1995 से पहले बड़ी मशक्कत से हासिल होता था। मिलने के स्रोत क्या थे तो जैसे भारत देश विविधताओं का देश है तो पानी की भी अपनी हर जगह अलग कहानी थी उत्तरी भारत में हिमालय की नदियां ही मुख्य स्रोत थी पानी का, इसलिए अक्सर शहर नदियों किनारे ही बसाए जाते थे क्योंकि अन्न से लेकर मवेशियों को पालने तक के सभी कार्य पानी के बिना सम्भव नहीं थे, जहां नदियों से दूर के क्षेत्र थे उनका पानी का मुख्य स्रोत कुआं और बावड़ी होता था। ग्रीष्म काल के समय अक्सर ये स्त्रोत सूखने के कारण कुछ ही जगह पानी की उपलब्धता होती थी, मीलों चल कहीं पानी मिलता था, परिवार के कुछ सदस्यों का दिन घर की पानी की जरूरत में ही निकल जाता था और रात अगले दिन के पानी के बंदोबस्त की सोच में निकल जाती थी। धन से पानी नहीं खरीदा जा सकता था श्रम की अधिक आवश्यकता पड़ती थी। और आज का मानव पानी की उपलब्धता की कद्र करने की बजाए उसके दोहन में लगा हुआ है उसे ज्ञात नहीं वक्त को लौटने में वक्त नहीं लगता।